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Aadhaar Virtual ID: आपकी बायोमेट्रिक डिटेल्स को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा लेयर

आधार डाटा की सुरक्षा को लेकर बढ़ते मुद्दों के बीच UIDAI ने डाटा के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अपना नया Virtual ID पेश किया है।

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Highlights

  • आधार वर्चुअल ID का लक्ष्य आपकी बायोमेट्रिक डिटेल्स को सुरक्षित रखना है।

  • आधार की वर्चुअल ID 12-डिजिट के आधार नंबर 16-डिजिट के एक रेंडमली जेनेरेट हुए नंबर से रिप्लेस करेगी।

  • आधार की वर्चुअल ID मार्च 2018 से जारी की जाएँगी।

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) ने बायोमेट्रिक डाटा को सुरक्षित रखने के लिए एक नई सुरक्षा लेयर को पेश कर दिया है, जिसे Virtual ID (VID) नाम दिया गया है। जैसा कि आपने देखा ही है कि आधार डाटा की सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ समय से कई बड़े मुद्दे सामने आ रहा हैं, और इसी को ध्यान में रखते हुए, और आपके डाटा को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने इस कदम को उठाया है।

आधार को आखिर क्यों निर्मित किया गया?

अभी तक, अगर चर्चा करें तो आपको एक बैंक में खाता खोलने के लिए, एक छोटी सी सिम लेने के लिए, लोन या पासपोर्ट आदि के लिए आवेदन करने के लिए न जाने कितने ही दस्तावेजों की आवश्यकता होती थी। इन दस्तावजों में आपका पैन कार्ड, पानी बिजली या टेलीफ़ोन का बिल, राशन कार्ड और न जाने किन किन महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को दिखाना होता था। आधार का निर्माण इसी को देखते हुए किया गया था कि आपको इतने सारे दस्तावजों को दिखाने के स्थान पर महज एक ही दस्तावेज प्रस्तुत करना पड़े।

आधार आपके पहचान पत्र के साथ साथ आपके पते को भी प्रमाणित करता है, इसमें आपको बायोमेट्रिक डाटा देना होता है, इसके लिए यह और भी महत्त्वपूर्ण बन जाता है। इसमें आपके फिंगरप्रिंट सुर आखों के IRIS को भी रखा जाता है। और जब आप इसे अपने पैन कार्ड के साथ लिंक कर देते हैं, बैंक अकाउंट से लीं कर देते हैं, और अन्य बिल आदि के साथ लीं कर देते हैं तो आपका काम और भी आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपनी आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं तो आई-टी डिपार्टमेंट आपके सभी विवरण – जैसे पिन, बैंक अकाउंट, एड्रेस, और आधार संख्या से अधिक प्राप्त कर सकता है। अगर कम शब्दों में कहें तो इसे दस्तावेजों की संख्या को कम करने के लिए निर्मित किया गया था, और इसलिए भी कि आपका सभी डाटा एक ही स्थान पर रखा जा सके।

LPG सब्सिडी के लिए आधार

वर्तमान में, प्रत्येक घर को एक वर्ष में सब्सिडी दर पर एलपीजी सिलेंडर दिए जाते हैं जो 14।2 किलोग्राम के होते हैं। अगर हम सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा दर को देखते हैं, तो इसकी लागत करीब 500 रुपये है। और, अगर एक घर में एक वर्ष में 12 से अधिक सिलेंडरों की जरूरत होती है, तो उन्हें गैर-सब्सिडी वाले लोगों को बाजार दर पर खरीदना पड़ता है, जो लगभग 750 रुपये खर्च करता है।


भारतीय सरकार द्वारा सभी घरों में LPG सब्सिडी भी दी जाती है, हालाँकि इसे प्राप्त करने के लिए आपको अपने आधार को अपने बैंक अकाउंट के साथ साथ एजेंसी से भी जोड़ना होता है, अर्थात् लिंक करना होता है। तेल कंपनी के साथ इन विवरणों को प्रस्तुत करने पर, सब्सिडी राशि सीधे आपके लिंक बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।

आधार की बढ़ती इम्पोर्टेंस

यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि आज के समय में आधार एक जरुर दस्तावजे बन गया है। जैसा कि आपको ऊपर बता दिया गया है, अगर आपको एक बैंक अकाउंट खोलना है, इनकम टैक्स रिटर्न भरना है, एक नया सिम खरीदना है, कॉलेज में दाखिला लेना है या इनमें से कोई भी काम करना है, या इसके अलावा भी कोई अन्य काम करना है तो आपको आधार कार्ड की जरुरत होगी। इसके अलावा अगर आगे इसकी चर्चा को बढ़ाये तो आपको बता देते हैं कि अगर आपको मैट्रिमोनी साइट पर अपने प्रोफाइल को रजिस्टर करना है तो भी आपको अपने आधार की जरूरत है।

इसके अलावा आजकल आपके आधार को आपके EPF अकाउंट के साथ भी लिंक होना जरुरी हैं, तभी आपको इस फण्ड के लाभ मिल पाएंगे। हालाँकि जैसे कि इस डाटा को ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है, और यह एक सिक्योर क्लाउड सर्वर पर रखा गया है। लेकिन इसके बाद भी इसके साथ कुछ रिस्क जुड़े हैं। कुछ भी फुलप्रूफ नहीं है। और हैकर्स के सामने कुछ भी टिकता नहीं है। यह कहीं न कहीं से किसी न किसी तरह इस डाटा को लीक कर ही लेते हैं। यह काफी सोचनीय पहलू है, इसी कारण आधार का डाटा और भी जरुरी बन जाता है।

आधार को लेकर चिंता और विवाद

आधार की पहल को इसलिए भी महत्त्वपूर्ण कहा जा सकता है क्योंकि इसके द्वारा आपके डाटा को एक ही स्थान पर रखा जाता है, और इस बात के लिए इसकी सराहना भी बनती है। हालाँकि इसके बाद भी इसमें कुछ कमियां हैं। कुछ लोगों को इसे लेकर डाटा की सुरक्षा और प्राइवेसी के पहलुओं से समस्या है। इसके अलावा जो लोग इस डाटा को एक्सेस कर सकते हैं, उन्हें आपके बारे में सभी जानकारी है। उदाहरण के लिए कहें, आपका आधार नंबर उस अस्पताल से जुड़ा हुआ है जहां आप नियमित जांच के लिए जाते हैं। जब आप मोबाइल सिम सेवा प्रदाताओं के पास एक नए सिम को खरीदने के लिए जाते हैं तो उसके पास इस नंबर के कारण ही आपकी सभी डिटेल मौजूद होंगी जैसे आपके बैंक का विवरण, आपका पता, बायोमैट्रिक डाटा और वह इससे भी अधिक आपके बारे में जान सकता है।

आई-टी विभाग के मामले में, इस सूचना के उपयोग से कर गणना के लिए चीजें कम हो सकती हैं। जैसे मान लीजिये कि इस डिपार्टमेंट को यह भी पता है कि आप अपने एन्प्लोयेर से क्या सैलरी लेते हैं, और आपका टैक्स वहीँ से काट लिया जाएगा। इसके अलावा यह इस बारे में भी जानते है कि आपकी अन्य इनकम क्या है।


हालाँकि अगर यह जानकारी गलत हाथों में पड़ जाती है तो यह एक बड़ा ही भयावह रूप ले सकती है। और उस समय क्या हो सकता है जब एक हैकर आपके आईरिस और फिंगरप्रिंट को एक्सेस कर ले। आप सोचा सकते हैं कि इस स्थिति में क्या हो सकता है।

आधार वर्चुअल ID आपके बायोमेट्रिक को सुरक्षित रखने का एक तरीका

“आधार संख्या को जीवन के लिए एक स्थायी आईडी होने के नाते, आधार नंबर धारक द्वारा इसका लगातार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए तंत्र प्रदान करने की ज़रूरत होती है, जबकि यूआईडीएआई ने कई आंकड़ों में आधार संख्या का संग्रहण और भंडारण की बेहतर व्यवस्था की है।” और इन सभी हाल की घटनाओं के बाद, गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को हल करने के लिए यूआईडीएआई ने आधार वर्चुअल आईडी नहीं पेश किया है।

अभी, आपको सेवा प्रदाता को अपना 12-अंकों का आधार नंबर देना होगा, जो आपके सभी विवरणों तक पहुंच सकता है। वर्चुअल आईडी (वीआईडी) के साथ, आपको 12-डिजिटल आधार संख्या देने की आवश्यकता नहीं होगी, इसके बजाय, आपको एक 16-अंकीय नंबर (वीआईडी) साझा करना होगा जो रेंडमली जेनेरेट होगा।


वर्चुअल ID मार्च 2018 से जारी किया जाएगा, और यह जून 2018 से अनिवार्य उपकरण बन जाएगा। एक आधार कार्ड धारक को यूआईडीएआई की वेबसाइट पर लॉग इन करने और इस 16-अंकों वाले वीआईडी का निर्माण करना होगा और फिर इसे सेवा प्रदाता के साथ साझा करना होगा। इसका लाभ यह है कि आप वास्तव में आपके 12 अंकों के आधार संख्या, और न ही आपके बायोमेट्रिक्स भी साझा करेंगे। सेवा प्रदाता आपको प्रमाणित करने के लिए केवल आवश्यक विवरण तक ही पहुंच प्राप्त करेगा।


उदाहरण के लिए, यदि आप एक नया सिम कनेक्शन चाहते हैं, तो दूरसंचार ऑपरेटर केवल आपके नाम, फोटो और पते पर पहुंच पाएंगे। हालांकि, यदि आप पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो प्राधिकरण को बायोमैट्रिक डाटा सहित सभी विवरणों तक पहुंच प्राप्त होगी, जो आवश्यक है। वर्चुअल ID, एक बार निर्मित किये जाने के बाद कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इस वर्चुअल ID को ऑनलाइन जाकर जितनी भी बार आप चाहे बदल सकते हैं।

ज़रूर, आधार वर्चुअल आईडी आपके बायोमेट्रिक्स और अन्य विवरण को सुरक्षित रखने के लिए एक अच्छा कदम दिखता है। जैसे ही UIDAI द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर पेश कर दिया जाता है, हम आपके सामने एक बार फिर हाजिर होंगे और आपको बतायेंगे कि आखिर कैसे आप इस virtual id को निर्मित कर सकते हैं।

  • Published Date: January 11, 2018 4:00 PM IST