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भारत की पहली महिला वकील के 151वें जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि

गूगल हर किसी खास मौके पर अपना डूडल बनाता है और आज यानि 15 नवंबर को Cornelia Sorabji की 151वी

  • Published: November 15, 2017 9:02 AM IST
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गूगल हर किसी खास मौके पर अपना डूडल बनाता है और आज यानि 15 नवंबर को Cornelia Sorabji की 151वीं जयंती पर शानदार डूडल बनाया है। गूगल ने अपने इस डूडल के माध्यम से Cornelia Sorabji को श्रद्धांजलि अर्पित की है। Cornelia एक प्रेरणादायक महिला थीं, जिनके नाम पर कई काम पहले करने का रिकॉर्ड है। भारत और ब्रिटेन में वकालत की प्रेक्टिस करने वाली पहली महिला थीं। इसके अलावा मुंबई विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होने वाली पहली महिला भी Cornelia ही थीं। इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाला पहला छात्र बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था।

उनका जन्म 1866 में मुंबई के नासिक में हुआ था। उनके पिता श्रद्धेय Sorabji Karsedji और उनकी माता फ्रांसिना फोर्ड के उन्हें मिलाकर नौ बच्चे थे। उनके पिता, जाहिरा तौर पर महिलाओं की शिक्षा को सुविधाजनक बनाने और महिलाओं को मुंबई विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री शिक्षा पाने में मदद करने के लिए एक प्रमुख व्यक्ति थे। उनकी मां ने पुणे में लड़कियों की शिक्षा के लिए कई स्कूलों की स्थापना की थी। इसे भी देखें: Oppo A79 के प्रेस रेंडर से सामने आया फुल स्क्रीन डिसप्ले के साथ पेश किया जा सकता है डिवाइस

मुंबई विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नेशनल इंडियन एसोसिएशन को आगे की शिक्षा के लिए सहायता मांगी और फ्लोरेंस नाइटिंगेल, मैरी हॉबहाउस, एडिलेड मैनिंग, सर विलियम वेडरबर्न जैसे कई लोगों ने उनकी आगे की पढ़ाई के लिए फंड का इंतजाम किया। इसे भी देखें: महज 1,300 रुपए से भी कम में आपका हो सकता है फ्लिपकार्ट का Billion Capture+ स्मार्टफोन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद Sorabji भारत लौटीं और समाज महिला वर्ग के अधिकारों के लिए कई बार उनके हक के लिए खड़ी हुईं। विधवाओं को पति की जायदाद में हिस्सा दिलवाने का फैसला इन्हीं में से एक था। उन्ही की कोशिशों के कारण ये सफल हो पाया था। इसे भी देखें: Amazon India और Mi.com के माध्यम से आज फिर से सेल के लिए आयेंगे शाओमी Redmi Y1 और Redmi Y1 Lite

उन्हें बंगाल के कोर्ट ऑफ वार्ड में लेडी सहायक नियुक्त किया था क्योंकि उन्होंने महिलाओं और नाबालिगों के लिए अदालत में महिलाओं के कानूनी प्रतिनिधियों के लिए याचिका दायर की थी। 1924 में कानून का पेशा अंततः भारत के लिए खोला गया, जिससे उन्हें अदालत में मुकदमे लड़ने की अनुमति मिल गई। माना जाता है कि सो Sorabji ने 600 से अधिक महिलाएं और बच्चों की सहायता की गई थी और अक्सर उनकी सेवा को मुफ्त में वितरित किया जाता था। साल 1929 में हाई कोर्ट रिटायर हुईं और लंदन के घर में 6 जुलाई 1954 को उनकी देहांत हो गया।

  • Published Date: November 15, 2017 9:02 AM IST