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भारतीय छात्रों ने बनाया नकली दवा पहचानने वाला ऐप, माइक्रोसॉफ्ट ने दिया 10 लाख का इनाम

ये छात्र बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के हैं।

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तीन भारतीय छात्रों ने माइक्रोसॉफ्ट का स्पेशल अवॉर्ड जीता है। ये छात्र बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने इन छात्रों को यह अवॉर्ड एक ऐप के लिए दिया है। यह ऐप फर्जी दवाओं को पहचानने का काम करेगा। इन छात्रों के द्वारा बनाया गया यह ऐप दवाओं के पैकेजिंग की जानकारी से फर्जी दवाओं को पहचानेगा। इन छात्रों को इस ऐप को बनाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने 10 लाख का पुरस्कार दिया है।

क्या है ऐप का नाम?
भारतीय  छात्रों को यह विशेष पुरस्कार माइक्रोसॉफ्ट के मुख्यालय में हुई सालाना माइक्रोसॉफ्ट इमेजिन कप वर्ल्ड चैंपियनशिप में मिला है। यह मुख्यालय अमेरिका के रेडमॉन्ड में है। इन छात्रों को यह पुरस्कार बिग डाटा कैटेगरी में मिला है। इन छात्रों ने जो ऐप बनाया है उसका नाम  DrugSafe है।

इन छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट ने इस ऐप के लिए करीब 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया है। इन छात्रों के नाम  चिदरुप आई, प्रतीक महापात्रा और श्रीहरि एचएस है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तीन छात्रों का एक दोस्त फर्जी दवाओं को खाकर बीमार हो गया था। इस घटना के बाद इन छात्रों को पता चला कि भारत में बिकने वाली सभी दवाओं में से करीब आधी फर्जी होती हैं। इसके बाद इन तीन छात्रों ने फर्जी दवाओं की पहचान करने के लिए ऐप के निर्माण का फैसला किया।

ऐसे काम करता है ये ऐप
यह ऐप तीन स्तरों पर नकली दवाओं की पहचान करता है। यह दवाओं के डिजाइन और पैकेजिंग की जानकारी लेकर असली मैन्युफैक्चरर के पेटेंट और ट्रेडमार्क से उनकी तुलना करता है और दवा के असली और नकली होने के बारे में जानकारी देता है।

  • Published Date: July 27, 2018 5:05 PM IST