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इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पहल के लिए इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के पास धन की कमी

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत धन की कमी का सामना कर रहा है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (मेइटी) देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत धन की कमी का सामना कर रहा है। मेइटी ने गणना की है कि उसे वित्त वर्ष 2017-18 में सब्सिडी के वितरण के लिए 1,050 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। उसे संशोधित विशेष प्रोत्साहन पैकेज योजना (एमएसआईपीएस) तथा इलेक्ट्रानिक विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी) के तहत 18.5 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से जो ब्योरा दिया है उसके अनुसार एमएसआईपीएस के तहत प्रोत्साहन वितरण को 808.32 करोड़ रुपए की राशि की जरूरत होगी। मंत्रालय को अभी तक एमएसआईपीएस के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को 256 आवेदकों से 1.28 लाख करोड़ रपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 17,997 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों के आवेदनों को स्वीकार किया गया है। वहीं 10,980 करोड़ रुपए के 33 निवेश आवेदनों को खारिज किया गया है। अन्य आवेदन प्रक्रिया में हैं।

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करीब 15 साल पहले जुलाई 2002 में एमएसआईपीएस योजना घोषित की गई थी। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में निवेश आकर्षित करना था। सरकार ने जनवरी में इस योजना में संशोधन कर इसकी अवधि घटाकर दिसंबर 2018 कर दी थी। और इसके तहत दी जाने वाली कुल सब्सिडी 10,000 करोड़ रुपए तक सीमित कर दी थी।

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