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अंतर-मंत्रालयी समूह का संकेत: दूरसंचार क्षेत्र में बड़े नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत नहीं

दूरसंचार क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत शायद नहीं होगी क्योंकि पहली तिमाही में क्षेत्र में सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं।

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दूरसंचार क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत शायद नहीं होगी क्योंकि पहली तिमाही में क्षेत्र में सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं। दूरसंचार पर अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) के एक सूत्र ने यह कहा। साथ ही समूह स्पेक्ट्रम भुगतान की मियाद बढ़ाकर 16 साल करने समेत कुछ उपायों पर विचार कर रहा है। इस प्रकार के प्रस्ताव से उद्योग को कुछ राहत मिल सकती है।

दूरसंचार क्षेत्र में वित्तीय दबाव तथा इस बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए गठित इस अंतर-मंत्रालयी समूह की विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए आज यहां बैठक हुई। सूत्रों ने कहा कि अगली बैठक 16 अगस्त को हो सकती है और ऐसी संभावना है कि रिपोर्ट पर 17 अगस्त को हस्ताक्षर होंगे।

समूह की सिफारिश दूरसंचार आयोग के समक्ष रखी जाएगी और उसके बाद उसे मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। करीब एक घंटे चली बैठक के बाद उसमें शामिल एक सूत्र ने कहा कि आईएमजी की सोच मोटे तौर पर यही है कि उद्योग में सकारात्मक संकेत को देखते हुए बड़े पैमाने पर नीतिगत हस्तक्षेप की संभवत: जरूरत नहीं होगी।

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हालांकि सूत्र ने कहा कि इस संदर्भ में कोई अंतिम निर्णय नहीं किया गया है तथा इस बारे में आगे और चर्चा की आवश्यकता है। अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारे पास उद्योग की मांग है लेकिन क्या जरूरत है और क्या नहीं, यह एक सवाल है।’’ फिलहाल आईएमजी जिन प्रस्तावों पर विचार कर रहा है, उसमें दूरसंचार कंपनियों को खरीदे गए स्पेक्ट्रम के भुगतान के लिए और समय दिया जाना शामिल है।

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अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इससे दूरसंचार कंपनियों का नकदी प्रवाह सुधरेगा। जिन अन्य प्रस्तावों पर विचार किया गया, उसमें स्पेक्ट्रम को गिरवी रखने की अनुमति देने के मुद्दे पर दूरसंचार विभाग तथा रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का मिलान तथा ब्याज एवं जुर्माना भुगतान के लिए पीएलआर से एमसीएलआर को अपनाना शामिल हैं।

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