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हकीकत में बदल गया है 3D प्रिंटेड हार्ट लेकिन अभी इसे असल में इस्तेमाल करने में लगेगा समय

क्या आने वाले समय में ये हार्ट काम करना शुरू कर देगा? अभी इस बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

ETH heart

ज्यूरिक में स्थित ETH विश्वविद्यालय की एक टीम एक नरम सिलिकॉन का हार्ट निर्माण करने में सफल हो गई है। और यह बिलकुल वैसे ही पंप भी करता है जैसा असल हार्ट करता है। और आने वाले समय में यह एक दिन इस सबसे महत्वपूर्ण अंग के लिए एक रिप्लेसमेंट के तौर पर भी काम करेगा, और अगर ऐसा होता है तो यह अपने आप में एक सबसे महत्त्वपूर्ण शोध और डिस्कवरी के रूप में जाना जाएगा।

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हृदय एक अविश्वसनीय जटिल पेशी है. जिसमें आपको बहुत से चैम्बर, पम्पस और वाल मिलते हैं। और इसके लिए किसी अल्टरनेट का निर्माण करना उतना ही कठिन कहा जा सकता है, जितना कुछ समय पहले चाँद पर जाना रहा होगा। या ऐसा भी कह सकते हैं कि उससे भी ज्यादा कठिन। यहाँ आपको ये बात भी ध्यान में रखनी है कि कैसे मानव शरीर किसी भी अन्य मटेरियल को रिजेक्ट कर देता। और इन सब बातों को ध्यान में रखकर एक ऐसे नए जीवन का निर्माण करना अपने आप में अद्वितीय ही कहा जा सकता है। और ये काम इस टीम ने कद दिखाया है।

महज एक चीज़ जो मानव शरीर एक्सेप्ट करती है वह है 3D प्रिंटेड, जिसे सिलिकॉन कहा जा सकता है। महज एक सिलिकॉन ही है जिसे मानव शरीर रिजेक्ट नहीं करता है। और 3D प्रिटिंग की खूबियों को इस्तेमाल में ले करके, किसी भी तरह की सॉफ्ट शेप्स का निर्माण किया जा सकता है। और जब ये बात हम शरीर के ओर्गंस को लेकर सोचते हैं तो यह एक अलग ही चीज बन जाती है।

ETH में ही पढ़ रहे टके विद्यार्थी Nicholas Cohrs ने एक आर्गेनिक हार्ट को एक टेम्पलेट की तरह इस्तेमाल करने एक हार्ट का निर्माण किया है। और इसमें इसने एक अलग चैम्बर को जोड़ा है, इसे वहां जोड़ा गया है जहां हार्ट की सेंट्रल वाल होती है। यह आमतौर पर हवा से भरी होती है। इसे हार्ट को पंप करने के लिए जोड़ा गया है। इस विडियो में आप इसे काम करते देख सकते हैं:

यहाँ बहुत से रक्त पंप मौजूद होते हैं जो कि खड़े हो सकते हैं, जबकि एक मरीज एक डोनर के दिल की प्रतीक्षा कर रहा होता है। हालाँकि यहाँ यह आर्टिफीसियल ऑर्गन इस्तेमाल में लिया जा सकता है जो लोगों की जान भी बचा सकता है, और आपको किसी भी डोनर की प्रतीक्षा करने की भी जरूरत नहीं है।

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ETH के अनुसार, इस तरह की एक खोज करना अपने आप में एक शानदार खोज कही जा सकती है इसके अलावा इसे क्रांतिकारी कहना भी गलत नहीं होगा। आपको बता दें कि दुनियाभर में लगभग 26 मिलियन लोग दिन की बिमारी से ग्रस्त हैं। जहां डोनर न मिलने के कारण कई बिन मौत भी मारे जाते हैं। और इस तरह के आर्टिफीसियल प्रोडक्ट के अस्तित्त्व में आने से इसे कम किया जा सकता है। और डोनर की भी राह देखना कम हो सकता है।

यह दिल निश्चित रूप से सही दिशा में एक कदम है, हालाँकि इस मॉडल को अभी भी अस्तित्त्व में आने में काफी समय लगने वाला है। इसके टेस्ट कंडीशन्स पर नजर डालें तो आपको बता देते हैं कि यह इस दौरान महज 80BPM को ही बनाये रखने में सक्षम हुआ है। और यह आंकड़ा 3,000 पम्पस के लिए देखा गया है। इसका वर्तमान में मतलब है कि यह हार्ट लगभग आधे घंटे से एक घंटे के तीसरे घंटे में ही काम करना बंद कर देगा।

अब देखना यह है कि इसे असल जिंदगी में आने में कितना समय लगता है। और अगर आने वाले में ऐसा होता है को उन सभी दिल के रोगों से पीड़ित लोगों को बचाया जा सकता है, जो समय पर डोनर न मिलने के कारण मर जाते हैं। हम सभी इस तकनीक के अस्तित्त्व में आने की राह देख रहे हैं।

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