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Best of 2017: भारत में 4G और सस्ते मोबाइल इंटरनेट का रहा बोलबाला

रिलायंस जियो ने घरेलू दूरसंचार क्षेत्र में एक क्रांति की शुरुआत करते हुए 4G को जन जन तक पहुँचाया, और फ़ोन निर्माताओं और मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ नई साझेदारी भी की है।

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2017 को एक ऐसे साल के रूप में देखा जाएगा जिसने भारतीय इंटरनेट और टेलीकॉम परिद्रश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। और इसी साल 4G इंटरनेट को बड़े पैमाने पर लोगों को इस्तेमाल करने की भी आज़ादी मिली है। इसके अलावा बहुत सस्ते दामों के अलावा आपको कुछ समय के लिए इंटरनेट को फ्री में भी उपलब्ध कराया गया है। और इसी चलन ने फिर एक नया ही रास्ता अपना लिया है, और आज भारत में इंटरनेट खासतौर पर 4G इंटरनेट की स्थिति में काफी बदलाव हुए हैं। प्रतियोगिता में बहुत तेजी आई, मांगों में विस्फोट हुआ, और इस क्षेत्र ने एक नया ही आयाम छु लिया है। अब टेलीकॉम क्षेत्र में जो भी बदलाव हो रहे थे फिर चाहे वह किसी भी कारण से रहे हों, उन्हें ‘Jio Effect’ के नाम से संबोधित किया जा रहा था। और जैसे जैसे इस साल का अंत हो रहा है, हमने इस साल हुए सभी इस तरह की घटनाओं को एक साथ क्लब करके आपके सामने लाने की सोची है, और इसका 2018 और उसके आगे क्या प्रभाव होने वाला है आज हम इसके बारे में भी जानेंगे।

टैरिफ वॉर्स

हम सभी जानते हैं कि रिलायंस जियो ने टेलीकॉम जगत में अपने कदम सितम्बर 2016 में किया था, और उसने इसी समय से यूजर्स को फ्री अनलिमिटेड डाटा, और वॉयस कॉल्स को मार्च 2017 तक के लिए दिया। हालाँकि जब कंपनी का Happy New Year ऑफर समाप्त हुआ, तब लोगों को लगा कि अब उन्हें फ्री में कुछ भी नहीं मिलने वाला है, लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने अपने इस फ्री सुविधा को June 2017 तक जारी कर दिया, और लोगों को इससे काफी ख़ुशी भी हुई। और यह समय लगभग 9 महीनों का जब भारत के उन सभी लोगों को फ्री में इंटरनेट दिया गया जो अभी तक इसके लिए पैसा दे रहे थे और बहुत ज्यादा पैसा दे रहे थे, हालाँकि इस समय इंटरनेट उन लोगों को भी मिलने लगा जिन्होंने अभी तक पैसा न देकर भी इसका इस्तेमाल नहीं किया था, अर्थात् जो इस्तेमाल कर रहे थे उन्हें भी और जो नहीं इस्तेमाल कर रहे थे उन्हें भी फ्री में लम्बे समय तक डाटा और वॉयस कॉल्स का लाभ मिलता रहा। और इसी के कारन जियो का नाम भारत में जल्दी से ऊँचाईयों पर पहुँच गया। और 6 महीनों में, इस नेटवर्क से लगभग 108 मिलियन सब्सक्राइबर जुड़े जिनमें से लगभग 72 मिलियन ऐसे थे जो जियो की प्राइम सदस्यता Rs. 99 देकर ले चुके थे। और विश्व में जियो कि ऐसा इकलौता नेटवर्क था जो लगभग 6 लाख सब्सक्राइबर अपने साथ जोड़ रहा था।

जुलाई में, जियो पहली बार अपने पेड प्लान के साथ सामने आया: इसका नाम था Summer Surprise Offer। इस प्लान के अंतर्गत आपको महज Rs. 303 में तीन महीनों के लिए अनलिमिटेड 4G डाटा ऑफर किया गया। इस तरह की कीमत पहले कभी भी नहीं देखी या सुनी गई थी, और न ही ऐसे प्लान पहले सामने आये थे। आपको बता दें कि अपनी इस सेवा को लॉन्च करते हुए रिलायंस जियो के चेयरमैन मुकेश अम्बानी ने कहा था कि डाटा आपको महज ‘वडा पाव’ के दामों में मिलेगा। यानी 1GB डाटा महज Rs. 10 में। इसके अलावा जियो ने अभी तक इस इंडस्ट्री में सबसे कम दामों में सब्सक्राइबर्स को डाटा मुहैया कराकर, एक नई ही क्रांति को जन्म दिया, यानी फ्री में लम्बे समय तक इंटरनेट को फ्री में देने के बाद आपको कौड़ियों के दामों में इंटरनेट ऑफर किया गया, और यह अभी तक जारी है।

इसके अलावा अगस्त आते आते, 1GB डाटा के कास्ट में 1.9 डॉलर (Rs. 122.5) की गिरावट आई अर्थात् इसमें लगभग 48 फीसदी की गिरावट महज एक साल के अंदर ही आ गई। यह आंकड़ा Mary Meeker Internet Trends Report 2017 में देखा गया है। इसके अलावा यहाँ यह बात देखने वाली है कि जियो के डाटा की कीमत औसत से काफी कम थी, यानी के अभी तक आपसे 1GB डाटा के लिए लगभग Rs. 11 लिए जा रहे थे। इसके बाद और ऐसा भी कह सकते हैं कि इसे देखते हुए सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों जैसे एयरटेल, वोडाफ़ोन, आईडिया सेलुलर, BSNL कुछ ऐसे प्लान के साथ सामने आये जिनकी कीमत काफी कम थी, और इस कम कीमत में यह सभी बड़ा और बहुत ज्यादा डाटा आपको ऑफर कर रहे थे। और यही था जियो इफ़ेक्ट जो अब सभी टेलीकॉम कंपनियों की आँखों में नजर आ रहा था। इसी को हम प्राइस वॉर के रूप में देख सकते हैं।

4G का विस्फोट (उभरकर सामने आना)

जैसे जैसे कीमतों में बड़ी गिरावट हो रही थी, वैसे वैसे मासिक डाटा की खपत में बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी हो रही थी, आपको बता दें कि भारतीय लगभग 1.2 बिलियन GB डाटा की खपत हर महीने करते हैं, यह आंकड़ा June 2017 का है। इसके अलावा आपको बता दें कि अगर इसके पहले के समय की चर्चा करें यानी 2016 में से इसकी तुलना करें तो यह आंकड़ा लगभग 10 गुना बढ़ा था। इस समय लगभग 200 मिलियन GB डाटा की ही मासिक खपत हो रही थी. और जियो इफ़ेक्ट अभी भी अपने चरम पर ही है। आपको बता दें कि 2017 के अंत में मोबाइल डाटा खपत लगभग 391 PB हो जायेगा वहीँ यह 2018 में 642PB भी पहुँच सकता है।

अगर स्मार्टफोंस की बात जाए, और इसमें फीचर फोंस को ऐड कर दिया जाये तो यह आंकड़ा 1,000PB की रेखा को कूद जाएगा, और 2019 तक यह लगभग 1099 PB आसपास होगा। और तब तक भारत के लगभग 60 फीसदी से ज्यादा लोग स्मार्टफोंस का इस्तेमाल कर रहे होंगे।

कम दामों वाले फोंस की क्रांति

स्मार्टफोन पर मोबाइल डाटा की खपत बढ़ने के बाद, जियो ने फीचर फोन बाजार पर अपना ध्यान केंद्रित किया जिसमें 400 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता शामिल थे। दुनिया में भारत ही एक ऐसा बाजार है जहां फीचर्स फोंस की मांग अभी भी और यह बाजार आगे भी बढ़ रहा है। जुलाई में जियोफ़ोन होने तक 4G या यहां तक कि 3G उन्माद पूरी तरह से बाजार के अंत तक नहीं पहुंच पाई है।

रिलायंस ने बहुत ही कम कीमत में अपना एक फीचरफोन लॉन्च किया जिसे हम JioPhone के नाम से जाने। इसका इफेक्टिव प्राइस 0 था। इसके अलावा इस फोन के साथ आपको अनलिमिटेड डाटा और अन्य सभी सुविधाएं भी मिली। इसके अलावा इन सब के साथ इस फोन की कीमत हो जाती है Rs. 1,500 जो आपको तीन साल के अंतर वापिस देने की भी बात कही गई है।

एक बार फिर, डोमिनोज़ इफेक्ट ने खेल खेला – इस बार बाजार की उस उपेक्षित सब-3,000 सेगमेंट में पूर्ण ओवरहाल लाया। अब इस रेस में एयरटेल और वोडाफोन के साथ साथ BSNL जैसे प्रतिद्वंद्वी दूरसंचार कंपनियां भी आ गई, और इन सभी ने घरेलू बजट फोन निर्माताओं के साथ भागीदारी की, जो लगभग चीनी ब्रांडों द्वारा मिटाए गए थे, और उन उपकरणों की घोषणा की, जो सुपर-आकर्षक डाटा पैक के साथ बुनियादी स्मार्टफोन की कार्यक्षमताओं को जोड़ते हैं।

अब बाजार में सबसे कम कीमत में फोन लाने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। एयरटेल ने कार्बन, लावा और इंटेक्स के अलावा सेलकन के साथ साझेदारी की और वहीँ वोडाफ़ोन-आईडिया ने माइक्रोमैक्स के साथ साझेदारी की, वहीँ बीएसएनएल ने लावा और माइक्रोमैक्स के साथ साझेदारी करके JioPhone की टक्कर में कई फोंस को बाजार में उतार दिया। और भारत के एक सबसे सस्ता स्मार्टफोन हर सप्ताह ही लॉन्च होना शुरू हो गया। हालाँकि अपनी पहली ही साल के लिए JioPhone को लगभग 6 मिलियन आर्डर प्राप्त हुए।

4G से 5G और उसके आगे

भारत अब 450 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल इंटरनेट बाज़ार है, जो कि केवल चीन से ही पीछे है। ट्राई डेटा के अनुसार कुल मिलाकर मोबाइल सदस्यता 1.18 बिलियन पार कर गई है। इसका मतलब है कि सभी दूरसंचार कंपनियां अपने 4G ग्राहकों को दोगुना करने या तिहराते हुए आगे बढ़ने का बड़ा अवसर देती हैं। ग्रामीण भारत के 16 प्रतिशत की तुलना में शहरी भारत का 51 प्रतिशत मोबाइल इंटरनेट पेनेट्रेशन है। इसलिए, विकास का अगला चरण बाजार के बजट के अंत में होगा, जहां सभी दूरसंचार कंपनियां पहले से ही वर्चस्व के लिए अपनी लड़ाई शुरू कर चुकी हैं। इस बीच, शहरी क्षेत्र, धीरे-धीरे 5G की ओर बढ़ेंगे जो कि वर्ष के उत्तरार्ध में कुछ चर्चाओं को उठाया था। सितम्बर में, एयरटेल पहला ऐसा टेलीकॉम ऑपरेटर बना गया जिसने अपनी 5G टेक्नोलॉजी (MIMO) को बेंगलुरु और कोलकाता में पेश किया। ऑपरेटर का वादा किया गया है कि इसके ग्राहक बिना किसी उन्नयन के अपने मौजूदा 4G हैंडसेट पर 2-3 गुना तेजी से डाटा स्पीड का आनंद ले सकते हैं। यह कार्य एयरटेल के चालू नेटवर्क परिवर्तन कार्यक्रम, प्रोजेक्ट लीप का हिस्सा है, जिसमें उसने 60,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

बड़े पैमाने पर मैसिव MIMO को धीरे-धीरे अन्य दूरसंचार सर्किलों में भी शुरू किया जाएगा। वोडाफोन और जियो भी तकनीक को लाने के लिए उपाय कर रहे हैं। वैश्विक नेटवर्क उपकरण निर्माता एरिक्सन और हुवावे दूरसंचार के साथ जुड़े हैं, ताकि भारत को 2020 तक तैयार किया जा सके।

  • Published Date: December 15, 2017 1:54 PM IST