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TimeLine: आइये एक नजर डालते हैं भारत में रिलायंस जियो सेवा के एक साल के सफ़र पर

रिलायंस जियो ने अपना एक साल पूरा कर लिया है; आइये एक नजर डालते हैं इस एक साल के दौरान कंपनी के उतार चढ़ावों पर...

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यह कहना कि रिलायंस जियो ने अपने लॉन्च के साथ ही टेलीकॉम जगत को हिलाकर रख दिया, किसी भी रूप में गलत नहीं है, हम सभी ने देखा है कि कैसे रिलायंस जियो ने अपनी सेवा को भारत में लॉन्च करने के पहले ही दिन से सभी अन्य टेलीकॉम कंपनियों की नाक में दम कर दिया था। इतना ही नहीं रिलायंस जियो ने उन सभी कंपनियों को बड़ा झटका भी दिया जो पहले से ही भारत में अपनी एक छवि निर्मित कर चुके थे। और अपने लॉन्च के पहले ही दिन से रिलायंस जियो देश भर में सभी की जुबान पर आने वाला पहला नाम बन गया था।

आपको बता दें कि रिलायंस जियो ने अपनी 4G सेवा की बीटा टेस्टिंग अपने लगभग 1 लाख से भी ज्यादा एम्प्लाइज के माध्यम से दिसम्बर 2015 में शुरू की थी। यह एक प्रीव्यू प्लान के रूप में सामने आई जो रिलायंस के LYF ब्रांड फोंस के साथ दी जा रही थी। इसके बाद इस सेवा को बढ़ा कर रिलायंस के कर्मचारियों के परिवारों तक पहुंचाई गई। इसके बाद वह सभी इस सेवा का लाभ ले सकते थे जिनके पास इस सेवा को सपोर्ट करने वाला फोन था।

रिलायंस जियो सेवा का लॉन्च

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रिलायंस जियो सेवा की यात्रा 1 सितम्बर 2016 को शुरू हुई थी, यानी आप से लगभग एक साल पहले इस यात्रा का आरम्भ हुआ था, और इसके बाद तो मानों टेलीकॉम जगत में एक नई क्रांति सी आ गई थी। इस दिन हुई रिलायंस जियो की एक AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अम्बानी ने इस सेवा की शुरुआत की थी, और 15 मिनट के उस भाषण में कंपनी ने सभी बड़ी अन्य टेलीकॉम कंपनियों की मज़बूत जड़ों को हिलाकर रख दिया था। इसे भी देखें: IFA 2017: हुवावे ने पेश किया नया चिपसेट, दे सकता है एप्पल और सैमसंग को टक्कर

अपनी शुरुआत के लिए कंपनी ने काफी अपरम्परागत (पढ़ने में यह काफी विवादास्पद लगता है) रास्ता चुना था. प्रतिस्पर्धी दरों की पेशकश करने के बजाय, कंपनी ने एक दूसरा रास्ता चुनते हुए यूजर्स को फ्री डाटा और कॉलिंग की पेशकश की, जो कंपनी को इतने बड़े पैमाने पर स्थापित करने के लिए एक विवादास्पद ही सही पर दूरदर्शी रास्ता था। और इसमें कोई दोराय नहीं है कि जो भी टेलीकॉम कंपनी यूजर्स को अगर फ्री डाटा, कॉलिंग और अन्य सेवाओं का लाभ फ्री में देती है तो वह उसकी और बड़ी संख्या में आकर्षित होंगे ही, और ऐसा ही हुआ। रिलायंस जियो ने काफी कम समय में ही अपनी ओर ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को आकर्षित करते हुए कई बड़े रिकॉर्ड भी कायम किये। हालाँकि बाद में यह यूजर्स उसी सेवा के पैसा देने के समय में कंपनी की को छोड़ भी रहे हैं। और यूजर्स बेस कम हो रहा है।

अन्य टेलीकॉम कंपनियों की कुछ ऐसी रही प्रतिक्रियाएं

समान रूप से अनायास ही था कि मौजूदा नेटवर्क ऑपरेटरों ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की। अपने आप को पिछड़ता देख अन्य सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने बड़े कदम उठाते हुए अपने टैरिफ प्लांस की दरों में भारी कटौती की घोषणा करना शुरू कर दिया, इन कंपनियों ने भारती एयरटेल, वोडाफ़ोन, और आईडिया सेलुलर थी। और इस समय जो भी कदम किसी भी टेलीकॉम का कंपनी की ओर से अपने बचाव में उठाया गया उसे ‘Reliance Jio Effect’ दे दिया गया। इस समय का माहौल ऐसा था कि मानों रिलायंस जियो अन्य सभी कंपनियों पर भारी पड़ रहा है और अपने आप को बाजार में बांये रखने के लिए ये कंपनियां बड़े से बड़े कदम उठा रही थी। सबसे बड़ा कदम जो देखने को मिला वह था वोडाफ़ोन और आईडिया सेलुलर का एक हो जाना। और यह आईडिया की ओर से एक बढ़िया कदम भी माना जा सकता है। क्योंकि उस समय शायद यही सही था। इसे भी देखें: जानें कैसे सैमसंग Bixby वॉयस अपने Galaxy S8 और Galaxy S8 Plus में इस्तेमाल करें

हालांकि कंपनी के लिए बहुत सारे अपवाद हैं, और इनके रास्ते भी कहीं न कहीं अलग हैं। जियो को भारी मांगों के साथ संघर्ष करना पड़ा है, जैसे काला बाजार, गति में कमी, बाजार में पहले से मौजूद अन्य टेलीकॉम कंपनियों के साथ पोल के मुद्दे, विरोधी प्रतिस्पर्धी प्रथाओं के आरोप आदि।

हालाँकि यह सब होने से आप और मेरे जैसे यूजर्स को काफी फायदा पहुंचा है। हालाँकि जियो की यह यात्रा कहीं भी किसी भी तरह से नियमित नहीं रही है, उसे कहीं न कहीं बड़े उतार चढ़ावों का सामना करना पड़ा है। और अब कंपनी ने इन्हीं उतार चढ़ावों के साथ अपना एक साल पूरा कर लिया है। इसे भी देखें: सैमसंग Galaxy C8 में होगा डुअल कैमरा, सामने आई जानकारी

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  • Published Date: September 4, 2017 2:20 PM IST