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Messenger For Kids: कितना सही और कितना गलत है, हमारे बच्चों के लिए

क्या वाकई एक पैरेंट होने के नाते आपको Messenger for Kids में कुछ ज्यादा कण्ट्रोल मिलने वाला है या फिर...

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हम सभी जानते हैं कि इंटरनेट और सोशल मीडिया कहीं न कहीं सभी पेरेंट्स के लिए एक खतरे की घंटी है। आजकल के बच्चे बड़े अडवांस होते जा रहे हैं। उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रहना पसंद आने लगा है। अब वह इंटरनेट पर क्या देखते हैं, और किस तरह की गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, इसे लेकर उन्हें पेरेंट्स काफी चिंता में रहते हैं। यह मुद्दा काफी समय से बड़ी बहस में भी रहा है। अभी हमने कुछ दिन पहले ही आपको बताया था कि कैसे इंटरनेट और सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से हमारे देश और दुनियाभर में कम उम्र के बच्चे अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। मैंने आपसे कुछ आंकडे भी इसे लेकर साझा किये थे। आप यहाँ इस बारे में जान सकते हैं कि आखिर सोशल मीडिया के कारण क्यों कम उम्र के बच्चे अपनी जान अपने हाथों ही दे देते हैं, अर्थात् खुदखुशी कर लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बारे में गहन चिंता भी व्यक्त की है।

हम उस वाकई के साक्षी हैं, जब ब्लू व्हेल गेम का आतंक पूरी दुनिया से होते हुए भारत में ही आया था। हालाँकि समय रहते ही इस जा लेवा गेम के बारे में पता चलना शुरू हो गया और इसे लेकर जागरूकता जल्दी से प्रसारित कर दी गई, हालाँकि इसके बाद भी बहुत से बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। जैसा कि मैं आपसे कह रहा हूँ कि इंटरनेट कैसे कहीं न कहीं हमारे बच्चों के दिमाग को अपनी ओर बड़ी तेजी से मोड़ लेता है। उसे यहाँ उस तरह की सामग्री तो मिलती ही है जो उसके विकास के लिए जरुरी कही जा सकती है, उसे दुनिया से जोड़े रख सकती है, लेकिन ऐसी भी सामग्री उसे इसी इंटरनेट पर ही मिलती है, जो उसे दिमागी रूप से बीमार कर सकती है। अपनों से दूर कर सकती है। और इसकी जान के लिए ख़तरा भी बन सकती है।

सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा को लेकर डिबेट

एक बड़ी डिबेट के हिस्सा भी पिछले काफी समय से यह मुद्दा ही है कि आखिर इंटरनेट हमारे बच्चों के लिए कितना सेफ है। जैसा कि हमने देखा था कि ब्लू व्हेल गेम को निर्मित करने वाले लोग महज कम उम्र के बच्चों को ही अपने जाल में फंसा रहे थे, और बच्चे अपनी नासमझी के कारण उनके जाल में फंसते जा रहे थे। और फंसते ही जा रहे थे।

एक सवाल यहाँ यह भी है कि आखिर क्या हम उस सभी सामग्री पर अपनी नजर रख सकते हैं, जो सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उनके द्वारा ब्राउज की जा रही है? यह एक बड़ा और वाकई बहुत बड़ा सवाल है। जब भी बच्चों को लेकर इंटरनेट आदि की चर्चा चलती है तो सबसे पहले सभी पेरेंट्स चिंताग्रस्त हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें अपने बच्चों से काफी लगाव है लेकिन वह उन्हें सोशल मीडिया या इंटरनेट पर जाने से नहीं रोक सकते हैं। कई बार बच्चे कहते हैं कि स्कूल से सम्बंधित शैक्षिक सामग्री उन्हें इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती है, इसके लिए वह इंटरनेट पर चले जाते हैं। अगर हम आज के दौर में महज सोशल मीडिया यानी फेसबुक की चर्चा करें तो भारत का लगभग बड़ा हिस्सा जो अभी 12-15 साल के बीच का है आपको फेसबुक पर मिल जायेगा।

जहां एक और फेसबुक से परेशान पेरेंट्स अपने बच्चों को किसी न किसी रूप में इसके आसपास भी नहीं देखना चाहते हैं, वहां फेसबुक ने एक नया ऐप बच्चों को ध्यान में रखकर पेश कर दिया है। हालाँकि इसे भारत में पेश किया जाएगा या नहीं इसके बारे में अभी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन इसे हम Messenger for Kids का नाम दे रहे हैं। इस ऐप को अभी हाल ही में US में iOS पर टेस्ट किया जा रहा है। और जल्द ही इसके फाइनल वर्जन को भी पेश कर दिया जाने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि जहां यह ऐप आपको अपने बच्चों पर ज्यादा नजर रखने में मदद करेगा। वहीँ आपके बच्चों को यह एक बार फिर से उसी सोशल मीडिया पर ले जाएगा, जहां से आप उन्हें बचाना चाह रहे हैं। हालाँकि इस बार आपको कुछ ज्यादा कण्ट्रोल मिलने वाला है, जैसे आपकी इजाजत के बिना आपका बच्चा किसी से भी दोस्ती नहीं कर सकता है, बात नहीं कर सकता है आदि।

 

इस ऐप को मुख्य तौर पर 9 से 13 साल की उम्र के बीच आने वाले बच्चों के लिए बनाया गया है। और इसी उम्र में बच्चा कुछ नया करने की, नए दोस्त बनाने की, और सबसे कनेक्ट रहने की कोशिश करता है, हालाँकि इन सब के बारे में वह अपने पेरेंट्स से कभी भी चर्चा नहीं करता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह उसे यह सब करने से मना कर देंगे।

क्या मैसेंजर फॉर किड्स गर्ल्स के लिए सुरक्षित है

जहां हम बात करते हैं, एक Like की तो लड़कियों को फेसबुक आदि पर Like आदि हासिल करना बड़ा पसंद आता है, उन्होंने एक फोटो को फेसबुक पर पोस्ट किया और कुछ ही समय में उसे ज्यादा लाइक मिल गए तो समझ लीजिये वह काफी खुश हो गई, इसके अलावा ऐसा ही कुछ ज्यादा उम्र की महिलाओं के साथ भी होता है। उनका भी कुछ ऐसा ही मन होता है, यानी सभी लड़कियों के लिए फेसबुक या अन्य किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर Like आदि हासिल करना पसंद आता है। हालाँकि कभी कभी उन्हें इसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। हमने भारत सहित दुनियाभर में ऐसे कई मामले देखें हैं जो महिलाओं से जुड़े होते हैं, यानी साइबर बुलींग के कारण उन्हें अपनी जान भी देनी पड़ी है। अब यहाँ सवाल उठता है कि क्या यह यहाँ फेसबुक ऐप इस तरह की परेशानी को हल करने में सक्षम होगा। क्या वह महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है।

किस तरह का कण्ट्रोल शामिल है

हालाँकि अगर ऐसा कहा जा रहा है कि सभी पेरेंट्स के अप्रूवल के बाद ही आपके बच्चे किसी के साथ दोस्तों और बातचीत कर सकते हैं, तो इसे कहीं न कहीं सही कहा जा सकता है लेकिन फिर भी हम अपने बच्चों को सोशल मीडिया और इंटरनेट के हवाले तो कर ही रहे हैं।

अब यहाँ सवाल यह भी उठता है कि आखिर किस तरह के कण्ट्रोल की चर्चा की जा रही है। क्या बच्चों की सभी गतिविधियों पर इसके द्वारा नजर रखी जा सकती है? या महज एक बार अप्रूवल मिलने के बाद पेरेंट्स इसपर नजर ही नहीं रख सकते हैं। यह एक बड़ी समस्या है। आपको बता दें कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले लम्बे समय से यही चर्चा बड़े पैमाने पर बच्चों और सोशल मीडिया को लेकर चलती आ रही है कि क्या बच्चों की गतिविधियों पर पेरेंट्स द्वारा नजर रखी जा सकती है। या यहाँ बच्चे अपनी मनमानी करते हैं। बिना पेरेंट्स की इजाजत के वह किसी को भी अपनी फ्रेंड लिस्ट में शामिल कर लेते हैं। और किसी से भी चैट करना शुरू कर देते हैं, फिर चाहे वह उसे आपसी तौर पर जानते हों या नहीं। लेकिन इस ऐप में इस समस्या को हल करते देखा जा रहा है। हालाँकि किस हद तक यह तो बाद में पता चलने वाला है।

क्या इंटरनेट या सोशल मीडिया हमारे बच्चों के लिए जरुरी है

अब यह सवाल ही बड़ा पेचीदा है। इसका जवाब आसानी से मिलना बड़ा मुश्किल है। आपको बता दें कि अगर आप अपने बच्चे को दुनियाभर से घर बैठे ही अवगत कराना चाहते हैं, तो आपको उसे इंटरनेट पर रास्ता दिखाना ही होगा, ऐसा मैं इसलिए भी कह रहा हूँ क्योंकि आजकल सभी बुक्स और शैक्षिक सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध हो गई है। आपको ज्यादा पैसा न खर्च करते हुए बड़ी आसानी से ही दुनियाभर में किसी भी किताब का आसानी से एक्सेस मिल जाता है, नोट्स आदि आपको बड़ी आसानी से मिल जाते हैं, अपने स्कूल के दोस्तों के साथ आप इंटरनेट के माध्यम से गेमिंग आदि कर सकते हैं, उनसे बाते कर सकते हैं, और अपने आपको एक टेक सेवी कह सकते हैं। हालाँकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आप अपने बच्चे के विकास में बाधा बन रहे हैं।

अब अगर मैं इस बात को देखूं कि अगर हमें अपने बच्चों के विकास के लिए सोशल मीडिया और इंटरनेट पर सहारा लेना पड़ रहा है, तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है। क्योंकि आपके पास शायद आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में उतना समय नहीं है कि आप अपने बच्चे के लिए किसी बुक खरीदने हेतु कई बाजारों में धक्के खाएं। असब सवाल उठता है कि अगर सोशल मीडिया और इंटरनेट किसी के बच्चे के विकास में सहायक है तो क्या यह उसके लिए सही और सुरक्षित है। पिछले सालों में सामने आये आंकड़े तो कुछ ऐसा दर्शाते नहीं हैं। यह तो कुछ और ही कहते हैं। अब चयन आपको करना है कि क्या आप अपने बच्चे को सोशल मीडिया या इंटरनेट पर ले जाना चाहते हैं तो आपको उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी खुद ही करनी होगी आपको इसके सभी वेबसाइट के एक्सेस को करीब से देखना होगा, कहीं वह किसी गलत राह पर तो नहीं है आदि। हालाँकि सोशल मीडिया को लेकर इस ऐप से कुछ उम्मीदें जरुर हैं लेकिन अभी भी इसे इतना कारगर नहीं कहा जा सकता है। और अगर यह ऐप भारत में आता है तो यह कैसा बदलाव करेगा यह देखना भी बाकी है।

  • Published Date: December 11, 2017 11:00 AM IST