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Supreme Court का TikTok ऐप पर बैन हटाने से इंकार

चीनी टेक्नोलॉजी कंपनी बाइटडांस का यह ऐप टिकटॉक अमेरिका एवं अन्य जगहों पर अवैध रूप से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने के लिए विवादों में रहा था।

TikTok

भारत समेत दुनियाभर में TikTok ऐप काफी लोकप्रिय है। हालांकि  गूगल और एप्पल ने भारत में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पॉप्युलर वीडियो मेकिंग ऐप TikTok को अपने प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद आज यानी 22 अप्रैल को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने TikTok ऐप से बैन हटाने को इंकार कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट को 24 अप्रैल तक टिक टॉक पर अंतरिम रोक के आदेश पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर उस दिन मद्रास हाईकोर्ट ने इस पर विचार नहीं किया तो अंतरिम रोक हट जाएगी। गूगल और एप्पल के ऐप पर रोक लगाने के बाद अब आप इन दोनों ऐप को गूगल के प्ले स्टोर और एप्पल के ऐप स्टोर से डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। भारत समेत दुनियाभर में TikTok ऐप काफी पॉप्युलर हैं। मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने इन दोनों कंपनियों से उनके प्लेटफॉर्म पर इन दोनों ऐप्स को हटाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद एप्पल और गूगल ने यह फैसला लिया है।
इससे पहले मालूम हो कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि TikTok ऐप से अश्लील कंटेंट को बढ़ावा मिल रहा है। कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए इसे बंद करने का आग्रह किया था। वहीं इसके जवाब में TikTok ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह ऐप बच्चों पर गलत इंपैक्ट डाल रहा है जिससे पोर्नोग्राफी को बढ़ावा मिल रहा है। जिन लोगों के स्मार्टफोन में ये ऐप पहले से उपलब्ध है वह इसका इस्तेमाल अभी भी कर पाएंगे। हालांकि नए यूजर्स इस ऐप को अब प्लेस्टोर से डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। TikTok ऐप पर अश्लील कंटेंट को बढ़ावा देने के आरोप में इस कंपनी के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला लिया। अश्लील कंटेंट के लिए आलोचनाओं का शिकार होने के बावजूद चीन की वीडियो शेयरिंग ऐप TikTok तेजी से भारत में पॉप्युलर हो रहा है। साल 2019 की पहली तिमाही में ऐप से 8.86 करोड़ भारतीय यूजर जुड़े हैं। मोबाइल ऐप इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टॉवर के विश्लेषण के अनुसार, पिछले साल पहली तिमाही की तुलना में टिकटॉक की देश में 8.2 गुना वृद्धि है।
चीनी टेक्नोलॉजी कंपनी बाइटडांस का यह ऐप टिकटॉक अमेरिका एवं अन्य जगहों पर अवैध रूप से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने के लिए विवादों में रहा था। मद्रास हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए इस माह कहा था कि केंद्र सरकार को इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए। अदालत ने कहा था, “यह पोर्नोग्राफी को बढ़ावा दे रहा है और बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहा है।”

भारत में करोड़ों लोग टिकटॉक का इस्तेमाल पहले से ही कर रहे हैं और उन सब के पास इस ऐप को अन्य के साथ साझा करने का विकल्प है। इसलिए गूगल प्ले स्टोर और एप्पल एप स्टोर पर इसकी पहुंच को रोकने का वांछित नतीजा नहीं निकलेगा। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। टिकटॉक बच्चों में भी काफी लोकप्रिय है, लेकिन ‘पोर्नग्राफिक कंटेंट’ के भी प्रसार को लेकर इसकी चौतरफा आलोचना हो रही है। गूगल और एप्पल ने सरकार के अनुरोध के बाद चीनी शार्ट वीडियो शेयरिंग एप के डाउनलोड पर रोक लगा दी है।
मार्केट रिसर्च फर्म टेकएआरसी के मुताबिक, लेकिन कई ऐसी तकनीक उपलब्ध हैं, जिससे इस प्रतिबंध का असर नहीं होगा। टेकएआरसी के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक फैसल काबूसा ने बताया कि टिकटॉक का कोई भी वर्तमान यूजर जिसने अपने स्मार्टफोन में इस एप को इंस्टाल कर रखा है, शेयरइट के जरिए इस एप को किसी के भी साथ साझा कर सकता है।
एक बार एप साझा करने के बाद बड़े आराम से इसे इंस्टाल किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन अप्रैल को मद्रास उच्च न्यायालय के मूल आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गूगल और एप्पल से इस एप को ब्लॉक करने को कहा था।

  • Published Date: April 22, 2019 11:52 AM IST