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ग्लोबल टेक कंपनियों Amazon, Google की बढ़ेंगी मुश्किलें, स्थानीय स्टार्टअप को मदद करेगी सरकार

भारत में करीब 50 करोड़ यूजर्स के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन रिटेल और कंटेंट के साथ साथ मैसेजिंग और डिजिटल पेमेंट में काफी ज्यादा स्कोप है। ग्लोबल कंपनियां इन सभी क्षत्रों में टॉप पर हैं, ऐसे में देसी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऐसे कदम उठा रही है। हाल में ही सरकार ने चाइनीज कंपनियों की 59 ऐप्स को भारत में बैन कर दिया है जिससे स्थानीय ऐप्स भारतीय मार्केट में अपना स्थान बना पाएंगे।

E-commerce Amazon Flipkart

Amazon, Google जैसी कंपनियों को अब भारत में कड़े कानूनों का सामना करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ग्लोबल टेक कंपनियों के एकाधिकार को कम करने पर काम कर रही है। भारत की लेटेस्ट ई-कॉमर्स पॉलिसी के ड्राफ्ट में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो लोकल स्टार्टअप्स को मदद करती है। सरकार पिछले दो साल से इस नई पॉलिसी पर काम कर रही है। नई पॉलिसी के जरिए केंद्र सरकार भारत में ग्लोबल टेक कंपनियों जैसे Amazon, गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet और Facebook के मार्केट में प्रभाव को कम करती है। Also Read - Infinix Hot 9 स्मार्टफोन की सेल आज, जानें कीमत और सेल ऑफर्स

NDTV ने ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया है कि इस ड्राफ्ट के 15 पेज के मुताबिक सरकार ई-कॉमर्स इंडस्ट्री को कॉम्पेटिव बनाने के लिए रेगूलेटर को अपॉइन्ट करने पर विचार कर रही है। यह पॉलिसी के मिनिस्ट्री ऑफर कॉमर्स के प्रमोशनल इंडस्ट्री और इंटरनल ट्रेड डिपार्टमेंट ने तैयार किया है। इस पॉलिसी के ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ऑनलाइन कंपनियों के सोर्स कोड और एल्गोरिद्म भी मांगेगी। इसकी मदद से सरकार डिजिटल पूर्वाग्रहों को मैनेज करने में मदद मिलेगी। Also Read - चीनी कंपनी ने चोरी चुपके बढ़ाई इस सस्ते स्मार्टफोन की कीमत, जानिए नया प्राइस

भारत में करीब 50 करोड़ यूजर्स के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन रिटेल और कंटेंट के साथ साथ मैसेजिंग और डिजिटल पेमेंट में काफी ज्यादा स्कोप है। ग्लोबल कंपनियां इन सभी क्षत्रों में टॉप पर हैं, ऐसे में देसी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऐसे कदम उठा रही है। हाल में ही सरकार ने चाइनीज कंपनियों की 59 ऐप्स को भारत में बैन कर दिया है जिससे स्थानीय ऐप्स भारतीय मार्केट में अपना स्थान बना पाएंगे।

मंत्रालय ने सभी स्टेकहोल्डर्स से इस पॉलिसी पर अपने विचार भी मांगे हैं। नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में कहा गया है कि कुछ प्रमुख कंपनियों की इंफॉर्मेशन पर नियंत्रण करने की प्रवृत्ति है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह भारतीय उपभोक्ताओं और लोकल इको सिस्टम के लिए अच्छा है कि इसमें बहुत सारे सर्विस प्रोवाइडर हैं। लेकिन नेटवर्क और डिजिटल प्रभाव के चलते कुछ प्रमुख कंपनियों की मार्केट में एकाधिकार है और वह इसका दुरुपयोग करते हैं। Also Read - Realme X50 Pro स्मार्टफोन पर मिलेगा एंड्रॉयड 11 बीटा अपडेट, ऐसे करें डाउनलोड

इसके साथ ही इस ड्राफ्ट में ई-कॉमर्स कंपनियों को स्थानीय डाटा कहां और कैसे संग्रहीत करना है इसका भी जिक्र है। इसके साथ ही सरकार स्टेकहोल्डर के साथ मिलकर ये भी तय करेगी कि किन कंपनियों को डाटा लोकलाइजेशन और मिररिंग जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ई-कॉर्मस कंपनियों को सरकार को 72 घंटों में डाटा उपलब्ध करवाना होगा जो कि राष्ट्र की सुरक्षा, टेक्स और कानूनी मामलों से जुड़ा हुआ होगा।

इसके साथ ही नई ड्राफ्ट पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को ग्राहकों को सेल की डिलेट के साथ, उनका फोन नंबरस कस्टमर कंप्लेट कॉन्टेक्ट, ईमेल और पता भी मुहैया करवाना होगा। इसके साथ ही आयात किए गए सामने पर जिस देश से आ रहा है उसका नाम साफ साफ बताया होगा। इसके साथ ही देश में काम कर रही विदेशी स्ट्रीमिंग कंपनियों को पेमेंट के लिए आवश्यक रूप से औपचारिक और रेगूलेटेड पेमेंट चैनल का इस्तेमाल करना होगा।

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  • Published Date: July 6, 2020 11:22 AM IST



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