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गूगल ने कैफी आजमी की 101वीं बर्थ एनिवर्सरी पर बनाया शानदार डूडल, 11 साल की उम्र से लिखने लगे थे गजल

Google celebrate indian urdu poet Kaifi Azmi 101 birth anniversary with its doodle: गूगल (Google) अक्सर आए दिन समाज में अपना योगदान देने वाले लोगों को अपने डडूल (Doodle) के जरिए याद करता रहता है। आज 14 जनवरी 2020 का भी दिन कुछ ऐसा ही है। गूगल कैफी आाजमी की 101वीं बर्थ एनिवर्सरी को सेलिब्रेट कर रहा है।

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Google celebrate indian urdu poet Kaifi Azmi 101 birth anniversary with its doodle: गूगल (Google) अक्सर आए दिन समाज में अपना योगदान देने वाले लोगों को अपने डडूल (Doodle) के जरिए याद करता रहता है। आज 14 जनवरी 2020 का भी दिन कुछ ऐसा ही है। गूगल कैफी आाजमी की 101वीं बर्थ एनिवर्सरी को सेलिब्रेट कर रहा है। आज गूगल ने अपने डूडल के जरिए Kaifi Azmi (कैफी आजमी) को याद किया है। गूगल ने अपने डूडल में कैफी आजमी का एक फोटो लगया है जिसमें वह माइक पर कुछ बताते हुए नजर आ रहे हैं। इस डूडल पर क्लिक करने पर आपको कैफी आजमी से संबंधित जानकारी मिल जाएगी।
वह एक भारतीय उर्दू कविकार थे। कैफी आजमी का जन्म आज 14 जनवरी 1919 को ही हुआ था। कैफी आजमी (असली नाम : अख्तर हुसैन रिजवी) उर्दू के एक अजीम शायर थे। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए भी कई प्रसिद्ध गीत व गजलें भी लिखीं, जिनमें देशभक्ति का अमर गीत -“कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों” भी शामिल है। Also Read - Happy New Year 2020: नए साल के जश्न में गूगल का शानदार डूडल

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शुरुआती जीवन: 11 साल की उम्र में लिखी गजल

कैफी का असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गांव मिजवां में 14 जनवरी 1919 को उनका जन्म हुआ था। गांव के माहौल में उन्हें कविताएं पढ़ने का शौक बचपन से ही लग गया था। भाइयों द्वारा प्रोत्साहित करने पर वह खुद भी लिखने लगे। 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली गजल लिखी।

मुशायरे में भी कमाया नाम

बड़े होते-होते वह मुशायरे में भी शामिल होने लगे। साल 1936 में साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने सदस्यता ग्रहण कर ली। धार्मिक रूढि़वादिता से परेशान कैफी को इस विचारधारा में जैसे सभी समस्याओं का हल मिल गया। उन्होंने निश्चय किया कि सामाजिक संदेश के लिए ही लेखनी का उपयोग करेंगे। 1943 में साम्यवादी दल ने मुंबई में कार्यालय शुरू किया और ‍उन्हें जिम्मेदारी देकर भेजा। यहां आकर कैफी ने उर्दू जर्नल ‘मजदूर मोहल्ला’ का संपादन भी किया। उनकी  शबाना आजमी और बाबा आजमी दो संतान हैं।

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  • Published Date: January 14, 2020 1:21 AM IST



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