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नकली दवाओं की बिक्री पर लगेगी रोक, सरकार बना रही QR कोड आधारित 'ट्रेस-एंड-ट्रेस' सिस्टम

पिछले कुछ वर्षों में, बाजार में नकली और घटिया दवाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ को राज्य दवा नियामकों ने जब्त कर लिया है।

Highlights

  • सरकार सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं के लिए ‘track and trace’ तंत्र लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
  • यह असली दवा की पहचान करेगा और नकली दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाएगा।
  • पहले चरण में सबसे ज्यादा बिकने वाली 300 दवाएं अपने 'प्राथमिक' पैकेजिंग लेबल पर बारकोड या क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड प्रिंट करेंगी।
QR Code trace and track fake medicine

(Image: Pixabay/ Mohamed_Hassan)



नकली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए सरकार एक प्लान बना रही है, जिसके तहत आप एक QR कोड स्कैन करके दवा की प्रमाणिकता जांच कर पाएंगे। TOI की खबर के मुताबिक, सरकार सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं के लिए ‘track and trace’ तंत्र लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जो नकली दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाएगा। आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। Also Read - QR कोड स्कैन करने पर हो गया ₹50,000 का नुकसान! स्कैमर्स ढूंढकर लाए हैं नया फ्रॉड

खबर के अनुसार, पहले चरण में सबसे ज्यादा बिकने वाली 300 दवाएं अपने ‘प्राथमिक’ पैकेजिंग लेबल पर बारकोड या क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड प्रिंट करेंगी या चिपकाएंगी। प्राथमिक का मतलब पहले लेवल की प्रोडक्ट पैकेजिंग है, जिसमें बिक्री योग्य वस्तुएं होती हैं। इनमें बोतल, कैन, जार और ट्यूब जैसी सील-बंद पैकेजिंग शामिल होती है। सबसे ज्यादा बिकने वाली इन 300 दवाओं में एंटीबायोटिक्स, कार्डिएक, दर्द निवारक गोलियां और एंटी-एलर्जी शामिल होने की उम्मीद है, जिनका MRP 100 रुपये प्रति स्ट्रिप से अधिक होगा। Also Read - Flipkart ने पेश किया नया 3D शॉपिंग फीचर, प्रोडक्ट का साइज समझने में मिलेगी मदद

ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने यह कदम एक दशक पहले संकल्पित किया था, लेकिन घरेलू फार्मा उद्योग में तैयारियों की कमी के कारण इसे रोक दिया गया था। यहां तक ​​कि एक्सपोर्ट के लिए भी “ट्रैक एंड ट्रेस” मैकेनिज्म को अगले साल अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया है। Also Read - WhatsApp अकाउंट को एक से ज्यादा डिवाइस में कैसे चलाएं, जानें पूरी डिटेल

दवाओं के पैकेज लेबल पर बारकोड या QR कोड सॉफ्टवेयर के जरिए प्रमाणीकरण प्रदान कर सकते हैं। एक बार सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद, उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा विकसित एक पोर्टल (वेबसाइट) पर यूनिक आईडी कोड फीड करके दवा की वास्तविकता की जांच कर सकेंगे और बाद में इसे मोबाइल फोन या टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी ट्रैक कर सकेंगे।

TOI की खबर के मुताबिक, पूरे उद्योग के लिए एकल बारकोड प्रदाता के रूप में एक केंद्रीय डेटाबेस एजेंसी स्थापित करने सहित कई विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है। इसे लागू करने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री से जुड़े एक प्लेयर का कहना है कि प्रणाली के शुरू होने से लागत में 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कुछ कंपनियों ने अभी से QR कोड जोड़ने शुरू कर दिए हैं।

नकली दवाओं के मामले

पिछले कुछ वर्षों में, बाजार में नकली और घटिया दवाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ को राज्य दवा नियामकों ने जब्त कर लिया है। हाल ही में, सामने आए प्रमुख मामलों में, Abott की थायरॉयड दवा Thyronorm शामिल है। तेलंगाना ड्रग्स अथॉरिटी ने कहा था कि यह मानक गुणवत्ता के तहत नहीं आती है, लेकिन कंपनी ने बताया कि जिस दवा का टेस्ट हुआ था वह नकली थी और इसके द्वारा निर्मित या मार्केट नहीं की गई थी।

एक अन्य उदाहरण में, Glenmark की ब्लड प्रेशर की गोली Telma-H के नकली ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया गया था। World Health Organization के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लगभग 10 प्रतिशत चिकित्सा उत्पाद घटिया या नकली हैं, हालांकि ये दुनिया के हर क्षेत्र में पाए जा सकते हैं।

  • Published Date: October 4, 2022 12:56 PM IST

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