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Coronavirus के नाम पर किस तरह से चोरी हो सकता है आपका बैंकिंग पासवर्ड और बहुत सा डेटा

कोरोना वायरस का प्रकोप दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में लोग इससे परेशान हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इसे किसी मौके से कम नहीं देख रहे हैं। हैकर्स कोरोना वायरस के नाम पर यूजर्स का कंप्यूटर हैक कर उनका डेटा चोरी कर रहे हैं।

Coronavirus 10

कोरोना वायरस का प्रकोप दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में लोग इससे परेशान हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इसे किसी मौके से कम नहीं देख रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। ये वायरस चीन से शुरू हुआ है। इसकी शुरुआत साल 2019 के दिसंबर में हुई थी और अब तक इससे 1,21,000 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या चार हजार के पार पहुंच चुकी है। इस महामारी के चलते कई विद्यालय और संस्थाएं बंद हो गई हैं। Also Read - E3 2020 Cancelled Over Coronavirus : कोरोनावायरस के चलते रद्द हुआ इलेक्ट्रॉनिक एंटरटेनमेंट एक्सपो

वहीं कई विश्विविद्यालय और संस्थाओं ने डैशबोर्ड तैयार किया है, जो कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को ट्रैक कर सकता है। इस स्थिति का लाभ अब हैकर्स उठा रहे हैं और वह लोगों के कंप्यूटर में मॉलवेयर भेज रहे हैं। Reason Labs की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स लाइव ट्रैकिंग मैप का सहारा लेकर लोगों की पर्सनल जानकारी चोरी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स यूजर्स का यूजर नेम, क्रेडिट कार्ड नंबर, पासवर्ड और अन्य जानकारी चोरी कर रहे हैं, जो उनके ब्राउजर में सेव है। Also Read - Jio ने कोरोना वायरस के कारण लिया फैसला, अब कर्मचारियों को नहीं करना होगा ये काम

Coronavirus के नाम पर कैसे चोरी होता है डेटा

रिसर्च में बताया गया है कि अटैकर्स ने ऐसी वेबसाइट डिजाइन की हैं, जो यूजर्स को कोरोना वायरस की अपडेट जानने के लिए एप डाउनलोड करने को प्रेरित करती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस एप को किसी इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं होती है और ये कोरोना वायरस का जानकारी वाला एक मैप शो करता है। इसकी मदद से हैकर्स विभिन्न फाइल बना लेते हैं, जो बात में आपके कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाती है। Also Read - No Time to Die की रिलीज डेट बढ़ी आगे, कोरोना वायरस के कारण लोगों को करना होगा लंबा इंतजार

ये फर्जी वेबसाइट असली जैसी नजर आती हैं, सिर्फ इनका यूआरएल अलग होता है। फिलहाल सिर्फ विंडोज यूजर्स ही इससे प्रभावित नजर आ रहे हैं, लेकिन यह अन्य ऑपरेटिंग सिस्मट तक भी पहुंच सकता है। रिसर्च में बताया गया है कि नया मॉलवेयर एक संदेहजनक सॉफ्टवेयर AZORult को एक्टिवेट कर देता है। जो एक जानकारी चुराने वाला सॉफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर को साल 2016 में विकसित किया गया था। जिसकी मदद से ब्राउजिंग हिस्ट्री, कूकिज, आईडी पासवर्ड, क्रिप्टोकरेंसी आदि की जानकारी चोरी की जा सकती है। यह कई अतिरिक्त मॉलवेयर प्रभावित सिस्टम में इंस्टॉल कर सकता है।

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  • Published Date: March 12, 2020 6:54 PM IST



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