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इसरो ने सफलतापूर्वक लॉन्च किए 8 सेटेलाइट, जानें क्यों है ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि

इसरो ने अब तक के अपने सबसे मुश्किल और लंबे मिशन को लॉन्च किया है। जिसकी दो खासियत हैं पहली, भारत में पहली बार छात्र के नेतृत्व वाले उपग्रह को लॉन्च किया। दूसरी यह कि पहली बार इसरो के PSLV रॉकेट ने 8 सैटेलाइट्स को दो अलग-अलग ऑर्बिट में लॉन्च किया है।

  • Updated: February 15, 2022 3:43 PM IST
pslv-c35


इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने सफलतापूर्वक 37वें पोलर सेटेलाइट लॉन्च विह्कल (PSLV) के मिशन PSLV-C35 को लॉन्च किया है। PSLV ने 8 सैटेलाइट्स को दो अलग-अलग ऑर्बिट लॉन्च किया गया। आंध्र प्रदेश के ​श्री​हरि​कोटा में इसे 9 बजकर 12 मिनट पर लॉन्च किया गया। इन 8 सेटेनाइट्स में भारत के तीन और अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया के 5 सैटेलाइट्स थे। पिछले कुछ महीनों में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक ही बार में 20 उपग्रहों को लॉन्च करने जैसी उपलब्धियां हासिल की है। किंतु आज लॉन्च किया गया इसरो का यह प्रक्षेपण पिछले मिशनों की तुलना में बेहद ही जटिल और चुनौ​तीपूर्ण था। आइए जानते हैं आज लॉन्च किया गया इसरो का यह प्रक्षेपण अब तक का सबसे एतिहासिक मिशन क्यों है। Also Read - Apple, Xiaomi, Samsung के फोन में 'GPS' की जगह लेगा 'NavIC', सरकार की बड़ी तैयारी

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प्रथम: छात्र के नेतृत्व वाला भारत का पहला सेटेलाइट प्रोग्राम Also Read - पीएम मोदी ने लॉन्च किया ISpA, सैटेलाइट के जरिए घर-घर पहुंचेगी ब्रॉडबैंड इंटरनेट

आज PSLV द्वारा भारत की तीन सेटेलाइट लॉन्च की गई। जिसमें से एक प्रथम थी, यह सेटेलाइट आईआईटी बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाई गई थी। आईआईटी बॉम्बे के सेंटर फॉर स्पेस साइंस टेक्सनोलॉजी रिसर्च में 2008 में प्रथम सेटेलाइट का कॉन्सेप्ट सामने आया। जिसे पूरा करने में 9 साल का समय लगा। प्रथम भारत का पहला सेटेलाइट है जिसे छात्रों द्वारा निर्मित किया गया है। प्रथम को चार पहले साल 2012 में लॉन्च होना था किंतु प्रशासनिक देरी और तकनीकी खामियों के कारण इसकी लॉन्च तिथि को बढ़ा दिया गया था।

इस सेटेलाइट को आईआईटी बॉम्बे के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के दो छात्रों सप्तर्षी बंद्दोपाध्याय और शशांक तमस्कर ने 2007 में तैयार किया गया। इसके दो साल बाद साल 2009 में सितंबर में इसरो के साथ मेमोंरेंडम ऑफ अन्डरस्टेंडिंग साइन किया गया जिसके बाद इसे बढ़ा कर 2014 कर दिया गया है। इसमें आईआईटी बॉम्बे के कुल छात्रों की संख्या 6 थी। इसके पूर्व प्रक्षेपण के लिए बेंगलूर में इसरो के साथ मिलकर काम किया गया। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने छात्रों को न केवल परीक्षण के लिए सभी संसाधन मुहैया कराए बल्कि लॉन्च से पहले प्रक्षेपण के लिए पूरा खर्चा भी दिया। सैमसंग गैलेक्सी आॅन8 स्मार्टफोन भारत में जल्द हो सकता है लॉन्च, एक्सक्लूसिवली फ्लिपकार्ट पर होगा उपलब्ध

इस सेटेलाइट का विस्तार 30.5cm X 33.5cm X 46.6 से.मी है और इसका वजन 10.12 किलोग्राम है। यह सेटेलाइट एल्यूमिनियम एलॉय और अन्य स्पेस ग्रेड मेटेरियल से बना है। इसमें तीन मोनोपॉल्स दिए गए हैं जिसमें जीपीएस, मेग्नेटोमीटर, सन सेंसर दिए गए हैं। वहीं ​ली—आॅन बैटरी और चार सोलर पैनल हैं। छात्रों द्वारा निर्मित इस सेटेलाइट का मिशन उपग्रह और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के ज्ञान प्राप्त करना है। इसे आईआईटी-बी के छात्रों द्वारा इसे डिजाइन किया गया है। इसका मकसद स्पेस में इलेक्ट्रॉन काउंट का अनुमान लगाना है। रिलायंस जीयो का प्रभाव: एयरटेल ने लॉन्च किया नया डाटा प्लान जिसमें मिलेगा 50 रुपए में 1जीबी डाटा

इसरो का सबसे लंबा मिशन

आल लॉन्च किया इसरो का यह मिशन इसलिए भी ऐजिहासिक है क्योंकि यह इसरो का अब तक का सबसे लंबा और जटिल मिशल है। इसमें एक ही रॉकेट के माध्यम से कई सेटेलाइट को अलग-अलग आॅर्बिट पर भेजा गया है। यह PSLV का पहला मिशन है जिसमें दो अलग—अलग आॅर्बिट पर पेलोड है। इसरो द्वारा मल्टीपल बर्न तकनीक को पहली बार 16 दिसंबर 2016 में टेस्ट किया गया था।

  • Published Date: September 26, 2016 2:05 PM IST
  • Updated Date: February 15, 2022 3:43 PM IST

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