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टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार से की सस्ता कर्ज दिलाने की मांग

नकदी की तंगी से जूझ रहे दूरसंचार उद्योग ने सोमवार को सरकार से दूरसंचार कंपनियों को कम ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने का आग्रह किया ताकि उनकी पूंजीगत लागत को कम किया जा सके।दूरसंचार उद्योग के प्रतिनिधियों ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करके अपने सुझाव दिए।

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नकदी की तंगी से जूझ रहे दूरसंचार उद्योग ने सोमवार को सरकार से दूरसंचार कंपनियों को कम ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने का आग्रह किया ताकि उनकी पूंजीगत लागत को कम किया जा सके।दूरसंचार उद्योग के प्रतिनिधियों ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करके अपने सुझाव दिए। दूरसंचार विभाग ने उद्योग को मंगलवार तक लिखित में सिफारिशें भेजने के लिए कहा है। विभाग इन मांगों को वित्त मंत्रालय को भेजेगा ताकि बजट में इन पर विचार किया जा सके।


एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इन मांगों के बारे में कहा कि, लाइसेंस शुल्क और सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ) शुल्क में कटौती सहित अधिकांश मांगें पहले जैसी ही हैं। अधिकारी ने कहा कि एक सिफारिश इनपुट लाइन क्रेडिट से जुड़ी है।

इसके अलावा , उद्योग ने दूरसंचार कंपनियों को कम दरों पर वित्तपोषण की सुविधा देने , लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) से जीएसटी हटाने तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान करने भी मांग की है। उद्योग ने सरकार से आग्रह किया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए दूरसंचार टावरों को संयंत्र और मशीन की परिभाषा में शामिल किया जाए।

टेलीकॉम कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा 2019

भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए साल 2019 में समस्याएं गहराती रहीं और पुरानी कंपनियां अस्तित्व बचाने के लिए सरकार तथा विनियामक ट्राई से लगातार बचाव की पुकार करती रहीं। कीमतों को लेकर छिड़ी जंग के बीच अरबों डॉलर की भारी – भरकम देनदारी ने दूरसंचार कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और उद्योग के सामने अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है।

सेवाओं की दर को लेकर नई और पुरानी दूरसंचार कंपनियों में छिड़ी जंग से उनके मुनाफे पर असर पड़ा है और बहुत सी कंपनियां बाजार से बाहर हो गयी हैं। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को उनके दूसरे कार्यों से आय (गैर – संचार राजस्व) को सकल समयोजित आय (एजीआर) की परिभाषा में शामिल करने का आदेश दिया था। इससे पुरानी दूरसंचार कंपनियों और रिलायंस जियो के बीच एक बार फिर जंग शुरू हो गई। हालांकि इसी दौरान सेवाओं की दरें बढ़ाने और न्यूनतम शुल्क तय करने के लिए कंपनियों के बीच बनी सहमति युद्ध विराम के संकेत देती है।

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  • Published Date: January 6, 2020 9:47 PM IST