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Union Budget 2017: अरूण जेटली से टैक इंडस्ट्री को ये है उम्मीद

देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली आज चौथी बार बजट पेश करेंगे। इस बजट से बाकी क्षेत्रों की तरह टैक जगत को भी काफी उम्मीद हैं। आई जानें क्या उम्मीद लगा रखी है टैक जगत ने।

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नरेंद्र मोदी की सरकार आज चौथी बार आम बजट पेश करेगी। संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से क्या निकलेगा इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं, इस बजट से टेक्नोलॉजी क्षेत्र को भी कई उम्मीदें हैं। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार मेक इन इंडिया और डिजटल इंडियो को लेकर और कई घोषणा कर सकती है। नोटबंदी के तीन महीने बीतने के बाद माना जा रहा है कि सरकार इस बजट में डिजिटल इकोनॉमी की ओर ज्यादा ध्यान देगी। वहीं, बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भले ही एक अप्रैल 2017 से लागू नहीं हो रहा है, लेकिन सरकार आम बजट में जीएसटी के लिए जमीन तैयार करने के लिए कदम उठा सकती है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को आम बजट 2017-18 पेश करते हुए सेवा कर की दरों में वृद्धि कर सकते हैं। सेवा कर की प्रभावी दर फिलहाल 15 फीसद है और आगामी आम बजट में इसे 16 फीसद के आसपास किया जा सकता है। केंद्र के इस कदम से मोबाइल पर बात करना महंगा हो सकता है। आइए जानते हैं आखिर भारतीय टैक इंडस्ट्री को आम बजट 2017-18 से क्या उम्मीद है। Also Read - ED ने चीनी लोन ऐप्स के खिलाफ की कार्रवाई, 46.67 करोड़ रुपये किए फ्रीज

हैंडसेट प्लेयर
आम बजट 2016-17 में सरकार ने मेड इन इंडिया पर जोर देते हुए बहार की कंपनियों को भारत में अपने प्रोडेक्ट बनाने की बात कही थी। इसी को देखते हुए माना जा रहा है कि इस वर्ष भी बजट में ऐसा कुछ हो सकता है। स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की नजर भी बजट पर रहेगी जिससे बजट श्रेणी में भारतीय उपभोक्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध करा सकें। वहीं, भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने वाले मोबाइल निर्माता कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ का मकसद हासिल करने में सपोर्ट पाने के अलावा करंसी कंट्रोल और आने वाले दिनों में इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में होने वाले बदलाव के चलते डिमांड में गिरावट से निपटने के लिए आज पेश होने वाले बजट में कुछ लोकलाइजेशन इंसेंटिव मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, जानकारी के मुताबिक सरकार ड्यूटी स्ट्रक्चर में बदलाव करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए फैसले होंगे, और इसके लिए सरकार इंपोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर की खामिंयों को दूर करेगी। फिलहाल कई चीजों के कच्चे माल का इंपोर्ट महंगा है और तैयार माल का इंपोर्ट सस्ता है। लिहाजा बजट में कच्चे माल का इंपोर्ट सस्ता किया जा सकता है और तैयार माल का इंपोर्ट महंगा करने का एलान किया जा सकता है। सरकार के इस कदम से मेटल, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बड़ी राहत मिल सकती है। Also Read - How to add Bank Account in Paytm: इस तरह पेटीएम में ऐड करें बैक अकाउंट, बहुत आसान है तरीका

टेलीकॉम
दूरसंचार उद्योग वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। लेकिन, महंगा स्पेक्ट्रम की कीमतों के लिए ही सीमित नहीं है। हालांकि टेलीकॉम क्षेत्र में रिलायंस जियो के प्रवेश के बाद इस क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखा गया है। जिसके बाद कई टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों को बांधे रखने के लिए हर दिन नए प्लान पेश कर रही हैं। वहीं, अपने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए जियो के नि: शुल्क प्लान की पेशकश के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारी दबाव में हैं। वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर का विलय इस बात की पुष्टि करता है। Also Read - Paytm से ऐसे लिंक करें Aadhaar Card, KYC कम्प्लीट करना भी है बहुत आसान

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई), जो दूरसंचार कंपनियों के बहुमत का प्रतिनिधित्व करता है, दूरसंचार सेवाओं के लिए कर की कम और वर्दी दरों के लिए आवश्यकता पर बल दे रहा है। वर्तमान में दूरसंचार सेवाओं पर सेवा कर 15 प्रतिशत की दर से दिया जाता है। जीएसटी के तहत कर में वृद्धि ग्राहकों के लिए लागत में वृद्धि और समग्र दूरसंचार उद्योग पर सीधा असर डाल सकती है।

फिन-टैक
सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद पेटीएम और मोबिक्विक लोगों के लिए भुगतान करने वाले मुख्य एप्स बन गए। नोटबंदी के बाद इन एप्स के यूजर्स की बढ़ोतरी में रातों-रात वृद्धी देखी गई। जिसे देखते हुए मोबाइल वॉलेट कंपनियों ने अपनी सर्विस को और बेहतर करने के लिए कई नए फीचर्स इसमें जोड़ें। ये सभी कंपनियां डिजिटल भुगतान के लिए इंटरनेट पर रियायतें मिलें इसकी उम्मीद कर रही हैं।

स्टार्टअप और ई-कॉमर्स
सरकार ने पहले स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए ही भारत स्टार्टअप जैसे मिशन की शुरुआत कर चुकी है। इन प्रयासों के कारण ही नए स्टार्टअप्स भारतीय बाजार में अपने लिए एक नाम बनाने में सफल हो रहे हैं। चूंकि स्टार्टअप ज्यादातर इंटरनेट के भरोसे हैं तो स्टार्टअप्स को उम्मीद है कि इस बजट में सरकार डिजिटल भुगतान के लिए इंटरनेट में तेजी, अच्छी कनेक्टिविटी और कई सुधार करे।

  • Published Date: February 1, 2017 8:00 AM IST

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