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Vivo की 'मनी लॉन्ड्रिंग' पर ED का बड़ा बयान, कहा- देश की अखंडता, संप्रभुता को खतरे में डालने की कोशिश

ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि वीवो से संबंध रखने वाली 22 कंपनियों के मालिक विदेशी हैं या हांग-कांग (Hong Kong) की इनटिटीज हैं। ED ने कहा कि पता चला है कि ज्यादातर फंड देश से बाहर चीन भेजे गए हैं, जिसकी जांच चल रही है।

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Vivo India द्वारा की ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ को प्रवर्त्तन निदेशालय (ED) ने देश की अखंडता, संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। ED ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी साफ तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त है और यह देश की वित्तीय सिस्टम को अस्थिर करने का प्रयास है, जो देश कि अंखडता और संप्रभुता के लिए खतरा है। Also Read - नहीं बैन होंगे 12 हजार रुपये से कम कीमत के चीनी स्मार्टफोन, नई रिपोर्ट का दावा

पिछले सप्ताह जांच एजेंसी ने दिल्ली हाई कोर्ट में चीनी कंपनी वीवो (Vivo) के भारतीय यूनिट से संबंधित 22 कंपनियों के खिलाफ हलफनामा (affidavit) या शपथ -पत्र दायर किया है और कहा है कि इन कंपनियों द्वारा चीन को संदिग्ध तरीके से पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। Also Read - Vivo V25 Pro का फर्स्ट लुक रिवील, Flipkart पर होगा खरीद के लिए उपलब्ध

जांच एजेंसी (ED) ने कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि इन 22 कंपनियों के मालिक विदेशी हैं या हांग-कांग (Hong Kong) की इनटिटीज हैं। ED ने कहा कि पता चला है कि ज्यादातर फंड देश से बाहर चीन भेजे गए हैं, जिसकी जांच चल रही है। Also Read - OPPO, Vivo, Xiaomi की कस्टम ड्यूटी चोरी पर ऐक्शन, सरकार ने भेजे नोटिस

GPICPL और Vivo के बीच लिंक

प्रवर्त्तन निदेशालय (ED) ने कहा कि इन 22 कंपनियों और जम्मू-कश्मीर के वीवो डिस्ट्रीब्यूटर ग्रांड प्रॉस्पेक्ट इंटरनेशनल कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (GPICPL) के बीच सामानांतर लिंक की बात कही है। GPICPL वही कंपनी है, जिसने खुद को फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके वीवो की सबसिडियरी कंपनी बताया था। GPICPL के खिलाफ पिछले साल 5 दिसंबर 2021 FIR रजिस्टर्ड किया गया था, जिसके बाद वीवो इंडिया के इस मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में जांच एजेंसी को पता चला।

ED ने बताया कि GPICPL द्वारा किए गए मनी लॉन्ड्रिंग काी फिलहाल जांच चल रही है। जांच एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें पता चला कि GPICPL की तर्ज पर देश में अलग-अलग राज्यों में Vivo ने यही ऑपरेशन मॉड्यूल अपनाया है। ED ने कहा कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर GPICPL कंपनी बनाने वाले नई दिल्ली बेस्ड चार्टेड अकाउंटेंट ने अगस्त 2014 में Vivo के लिए ऐसी कंपनियां बनाई है।

ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की फाइलिंग में पाया कि GPICPL द्वारा इस्तेमाल किया गया ई-मेल आईडी peter.ou@vivoglobal.com है, जो Vivo और GPICPL के बीच संबंध को साबित करता है।

‘मनी लॉन्ड्रिंग एक वित्तीय आतंकवाद’

प्रवर्त्तन निदेशालय ने ओड़िसा हाईकोर्ट द्वारा 2020 में दिए गए एक जजमेंट का रेफरेंस देते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक ‘फाइनेंशियल (वित्तीय) आतंकवाद’ है। रिपोर्ट के मुताबिक, Vivo के पूर्व डायरेक्टर Bon Lou और चीनी नागरिक Zhixin Wei ने मिलकर ये 22 कंपनियां बनाई। इनमें 18 कंपनियां Bin Lou ने सेटअप किया था, जबकि बची हुई 4 कंपनियां Zhixin Wei ने साल 2014-15 में बनाई थी।

जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि GPICPL के दो डायरेक्टर्स Zhengshen Ou और Zhang Jie ने दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दायर करने के 10 दिन बाद भारत छोड़ दिया। चीनी डायरेक्टर्स ने जांच एजेंसी को जांच में सहयोग देने की बजाय देश छोड़ दिया। ED ने 3 फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग का केस रजिस्टर किया था।

ED ने यह भी कहा कि GPICPL की वित्तीय जांच करने के बाद पचा चला कि दो बैंक के तीन अकाउंट्स में 1,487 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। करीब 1,200 करोड़ रुपये Vivo Mobile India Pvt Ltd को ट्रांसफर किया गया है। Vivo पर 62,476 करोड़ रुपये विदेश ट्रांसफर करने का आरोप लगा है।

जुलाई की शुरुआत में ED ने कंपनी पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए 119 बैंक अकाउंट्स फ्रिज कर दिए थे। 13 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने वीवो इंडिया के बैंक अकाउंट पर लगे ताले को हटा दिया और कहा था कि कंपनी को 7 दिनों के अंदर 950 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देनी पड़ेगी।

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  • Published Date: July 25, 2022 10:21 AM IST



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