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Kr00k Vulnerability : खतरे में प्राइवेसी, आसानी से हैक किए जा सकते हैं Wi-Fi डिवाइसेज

RSA 2020 कॉन्फ्रेंस में स्लोवाक इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी (ESET), ने नए Kr00k Vulnerability (वल्नरबिलिटी) (CVE-2019-15126) का खुलासा किया है। इसके मुताबिक दुनियाभर में करोड़ों डिवाइस जिनमें वाई-फाई कनेक्टिविटी है उन्हें आसानी से हैक किया जा सकता है।

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RSA 2020 कॉन्फ्रेंस में स्लोवाक इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी (ESET), ने नए Kr00k Vulnerability (वल्नरबिलिटी) (CVE-2019-15126) का खुलासा किया है। इसके मुताबिक दुनियाभर में करोड़ों डिवाइस जिनमें वाई-फाई कनेक्टिविटी है उन्हें आसानी से हैक किया जा सकता है। इस बग के कारण हैकर्स किसी भी डिवाइस में वायरलैस नेटवर्क पैकेट ट्रासंमिट कर डिवाइस को हैक कर सकते हैं। इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी का कहना है कि AES-CCMP एन्क्रिप्शन के जरिए WPA2-Personal और WPA2-Enterprise दोनों प्रोटोकॉल को प्रभावित किया जा सकता है। Also Read - Realme 6 और Realme 6 Pro स्मार्टफोन की कीमतें लॉन्च से पहले हुई लीक

Kr00k vulnerability detailed:

इस रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी कोई भी डिवािस जिसमें साइप्रेस सेमिकंडक्टर (Cypress Semiconductor) और ब्रोडकॉम (Broadcom) के Wi-Fi चिपसेट लगे हैं वे सभी Kr00k Vulnerability (क्रूक असुरक्षा) के शिकार हो सकते हैं।इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी के एक्सपर्ट्स का कहना है कि उन्होंने इस समस्या का परीक्षण कई सारे लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, राउटर्स और IoT डिवाइस में किया है और इसे कंफर्म किया है। ऐसे में इससे दुनियाभर में करोड़ों डिवाइसेस प्रभावित हो सकती हैं।

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एक्सपर्ट के मुताबिक Kr00k vulnerability की समस्या एंस्क्रिप्शन के कारण सामने आई है, जो कि वाई-फाई के जरिए किसी डाटा पैकेज को ट्रांसमिशन को प्रोटेक्ट करता है। ये पैकेज यूनिक-की से इंक्रिप्टेड रहते हैं जो कि Wi Fi के पासवर्ड पर डिपेंड करता है। ये पासवर्ड यूजर द्वारा बनाया होता है। Broadcom और Cypress चिप वाले डिवाइस को हैक करने के लिए Kr00k vulnerability प्रोसेस के तहत Key को जीरो पर टैंप्रेरी शटडाउन किया जाता है। Kr00k  की मदद से डिवाइस से यूजर का डाटा एक्सेस किया जा सकता है। Also Read - वीवो ने लॉन्च किया 5G स्मार्टफोन Vivo Z6, जानिए इसकी कीमत और खास फीचर

ESET के एक्सपर्ट के मुताबिक, Kr00k vulnerability की समस्या कुछ हद तक KRACK vulnerability जैसी ही है जो कि साल 2017 में पहली बार सामने आई थी। ये सिक्योरिटी फ्लॉप्स हैकर्स को यूजर का डाटा एक्सेस करने का विकल्प देते हैं। हैकर्स Wi-Fi के पासवर्ड को ट्रासंमिशन पैकेज के जरिए जीरो पर रिसेट कर देते हैं और वे डिवाइस से यूजर का डाटा एक्सेस कर लेते हैं।

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  • Published Date: February 29, 2020 4:38 PM IST