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Xiaomi को HC से बड़ा झटका, FEMA मामले में कोर्ट ने कहा- संबंधित अथॉरिटी लेगी फैसला

Xiaomi India ने वित्तीय अनियमितता मामले में ED द्वारा 5,500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने पर कर्नाटक हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी, जिस पर कोर्ट ने आदेश जारी किया है। आइए, जानते हैं पूरा मामला...

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वित्तीय अनियमितता मामले में Xiaomi India को बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने ED द्वारा की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि संबंधित ऑथोरिटी इस मामले में फैसला ले सकती है। मई में ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने FEMA के तहत शाओमी की लगभग 5,500 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज की थी, जिसके विरोध में कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट मे गुहार लगाई थी। कोर्ट ने प्रॉपर्टी सीज करने के 60 दिनों के अंदर मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित ऑथोरिटी के ऐक्शन को सही ठहराया है। Also Read - 64MP कैमरा, 8GB तक RAM और 4250mAh बैटरी वाले Xiaomi 11 Lite NE 5G पर तगड़ा Discount, Amazon से सस्ते में खरीदने का मौका

संपत्ति अगले आदेश तक रहेगी सीज

शाओमी द्वारा हाईकोर्ट में किए गए अपील को ED काउंसेल ने प्रीमैच्योर एक्शन बताया है। ED की तरफ से एडीशनल सॉलिसिटर जनरल कोर्ट में पेश हुए थे। मंगलवार 5 जुलाई को कर्नाटक हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद सिंगल बेंच जज जस्टिस एसजी पंडित ने आदेश जारी करते हुए कहा कि शाओमी की संपत्ति तब तक सीज रहेगी, जब तक संबंधित ऑथिरिटी कोई ऑर्डर न पास करे। Also Read - Xiaomi ने पहला Humanoid रोबोट CyberOne किया लॉन्च, इंसानों की तरह करता है वॉक

जस्टिस एसजी पंडित ने एडीशनल सॉलिसिटर जनरल की दलील को स्वीकारते हुए यह आदेश जारी किया है। ED काउंसेल ने कोर्ट में बताया कि चीनी स्मार्टफोन मेकर Xiaomi ने समय से पहले कोर्ट की तरफ रूख किया है। शाओमी द्वारा की गई वित्तीय अनियमितता मामले में ED की तरफ से संबंधित ऑथोरिटी चैन्नई के चीफ कमीश्नर (कस्टम) हैं, जो हाईकोर्ट द्वारा दी गई जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद इस मामले की आगे सुनवाई करेंगे। Also Read - Redmi K50 Ultra vs OnePlus 10T: रेडमी और वनप्लस के फ्लैगशिप फोन में बेहतर कौन?

शाओमी इंडिया ने कही ये बात

Xiaomi के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए आदेश की कॉपी का इंतजार कर रही है, इसके बाद इस मामले में आगे कोई ऐक्शन लिया जाएगा। एक जिम्मेदार कंपनी होने के नाते हम भारत के सभी नियमों का पालन करना अपनी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानते हैं, हम आगे भी यहां के नियमों का पालन करना जारी रखेंगे।

मई में प्रवर्तन निदेशालय ने शाओमी की भारतीय इकाई के 5,500 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज की थी। कंपनी पर भारत से बाहर थर्ड पार्टी को गैरकानूनी तरीके से पेमेंट करने का आरोप है, जिसे कंपनी ने रॉयलिटी बताया है।

रॉयलिटी देना गलत नहीं

ED द्वारा की गई कार्रवाई पर शाओमी इंडिया ने कहा था कि हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। कंपनी द्वारा दी गई रॉयलिटी पेमेंट वैध है। ED जिस पेमेंट को अवैध बता रही है, उसमें से 84 प्रतिशत रॉयलिटी पेमेंट है, जिसे कंपनी ने अमेरिकी चिप मैन्युफैक्चरर Qualcomm को ट्रांसफर किया है। वहीं, बांकी की रॉयलिटी Xiaomi India की चीन स्थित पैरेंट कंपनी को ट्रांसफर किया गया है।

India Cellular Electronics Association (ICEA) ने भी शाओमी इंडिया को सपोर्ट करते हुए फाइनेंस, कॉमर्स और आईटी मंत्रालय को सेलुलर कंपनियों द्वारा की जाने वाली रॉयलिटी पेमेंट के बारे में लिखा है और बताया कि सेलुलर डिवाइस बनाने वाली कंपनी के लिए रॉयलिटी का भुगतान करना जरूरी है, यह अवैध नहीं होता है। हालांकि, शाओमी इंडिया की इस वित्तीय अनियमितता मामले की आगे जांच की जाएगी, इसका बाद ही संबंधित ऑथोरिटी कोई फैसला सुनाएगी।

दूसरी तरफ एक और चीनी कंपनी Vivo India पर भी मनी लॉन्ड्रिंग की तलवार लटकी है। पर्वत्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 5 जुलाई को वीवो और उसकी सहयोगी कंपनियों के 44 ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी को वीवो द्वारा किए गए पेमेंट में कुछ गड़बड़ियों का पता चला था, जिसके बाद एजेंसी ने यह कार्रवाई की है।

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  • Published Date: July 6, 2022 9:21 AM IST
  • Updated Date: July 6, 2022 10:35 AM IST



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