comscore बच्चों में तनाव, चिंता और अकेलेपन के बीज बो रहा है Smartphone
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'बच्चों में तनाव, चिंता और अकेलेपन के बीज बो रहा है Smartphone'

आज कल लोगों के बीच स्मार्टफोन का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है और यह आज हमारी जिदंगी का एक अभिन्न अंग बन गया है। हालांकि स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा विपरीत प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। शुरुआत में यह बच्चों के लिए यह एक महत्वपूर्ण टूल था क्योंकि यह बच्चों को होमवर्क और स्कूल के बाद की एक्टिविटी के लिए एक अहम जरिया था। लेकिन अब इसके विपरीत प्रभाव भी देखे जा सकते हैं। आज स्मार्टफोन बच्चों के लिए तनाव और चिंता का स्रोत बनता जा रहा है।

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(Photo credit: Pixabay)


आज कल लोगों के बीच स्मार्टफोन का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है और यह आज हमारी जिदंगी का एक अभिन्न अंग बन गया है। हालांकि स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा विपरीत प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। शुरुआत में यह बच्चों के लिए यह एक महत्वपूर्ण टूल था क्योंकि यह बच्चों को होमवर्क और स्कूल के बाद की एक्टिविटी के लिए एक अहम जरिया था। लेकिन अब इसके विपरीत प्रभाव भी देखे जा सकते हैं। आज स्मार्टफोन बच्चों के लिए तनाव और चिंता का स्रोत बनता जा रहा है।
स्मार्टफोन में कई तरह के सोशल मीडिया ऐप्स आते हैं, और इन ऐप्स पर आने वाली लगातार नोटिफिकेशंस से न केवल बच्चों को ध्यान भंग होता है बल्कि यह तनाव का भी एक कारण बनता जा रहा है।

स्मार्टफोन के बच्चों पर पड़े प्रभाव को जानने के लिए आप Rice University के साइकलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर Philip Kortum की रिसर्च को पड़ सकते हैं। उन्होंने अपनी रिसर्च का नाम “You Can Lead a Horse to Water But You Cannot Make Him Learn: Smartphone Use in Higher Education” दिया हुआ है। यह रिपोर्ट 2015 की है।Kortum ने कहा है कि स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी दुनिया के सभी मार्केटों में प्रवेश कर रही है और यह अधिकांश कॉलेजों में अनिवार्य भी हो गई है। उन्होंने कहा कि हम यह जानने को उत्सुक थे कि जो स्टूडेंट्स अभी तक स्मार्टफोन को इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उनकी एजुकेशन पर यह स्मार्टफोन कैसे प्रभाव डालेगा। रिसर्च से पता चलता है कि स्टूडेंट्स को शुरुआत में महसूस हुआ कि मोबाइल डिवाइस ने उनकी परफॉर्मेंस में सुधार किया है। इससे होमवर्क, टेस्ट अच्छे ग्रेड्स शामिल हैं।

हालांकि रिपोर्ट में इसके बाद विपरीत प्रभाव भी देखने को मिले। इस रिसर्च का टाइटल नेम ‘Digital Addiction: Increased Loneliness, Anxiety, and Depression’ था। इसमें दावा किया कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल का असर दूसरे पदार्थों के इस्तेमाल के समान हो सकता है। San Francisco State University के हेल्थ एजुकेशन के प्रोफेसर Erik Peper ने कहा कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल की लत मस्तिष्क में न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन बनाने के तरीके से शुरू होती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे Oxycontin लेने वालों को दर्द से राहत लेने के लिए opioid  की लत लगती है। इसके अलावा सोशल मीडिया टेक्नोलॉजी रियल सोशल कनेक्शन पर नकरात्मक प्रभाव डालती है। रिसर्चर्स ने पाया कि जो स्टूडेंट्स अधिक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं उनमें सबसे ज्यादा अकेलेपन, तनाव और चिंता की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं।

 

  • Published Date: June 25, 2019 11:01 AM IST